सुप्रीम कोर्ट ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के उस आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है जिसमें बालाघाट जिले की दो मासूम बच्चियों के अपहरण और हत्या के मामले में कथित “मिस गाइडेड इन्वेस्टिगेशन” (गुमराह जांच) करने पर एक पुलिस निरीक्षक चैन सिंह उइके पर एक लाख रुपए का दंड लगाया गया था। हाईकोर्ट ने अपने निर्णय में पुलिस जांच को “दुर्भावनापूर्ण और लापरवाह” कहा था, जिसके कारण आरोपी को साढ़े तीन साल जेल में बंद रहना पड़ा, जबकि बाद में वह बरी कर दिया गया। न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन और न्यायमूर्ति पीबी वराले की पीठ पुलिस निरीक्षक चैन सिंह उइके द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें दो लड़कियों के अपहरण और हत्या के दोषी व्यक्ति की मौत की सजा को पलट दिया था और कहा था कि पुलिस जांच दुर्भावनापूर्ण थी। सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश पुलिस को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। हाईकोर्ट के फैसले को दी थी चुनौती
याचिकाकर्ता की सीमित शिकायत यह है कि उच्च न्यायालय ने कोई अवसर दिए बिना विवादित निर्णय और आदेश के पैराग्राफ 55 और 57(iii) में प्रतिकूल टिप्पणियां की हैं और याचिकाकर्ता से वसूलने योग्य 1,00,000 रुपए का जुर्माना भी लगाया है। सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि हाई कोर्ट ने बिना पक्ष सुने पुलिस अधिकारी पर गंभीर टिप्पणियां कर दीं, इसलिए आदेश के पैराग्राफ 57 (iii) पर रोक दी जाती है। सुप्रीम कोर्ट ने एमपी पुलिस को नोटिस जारी कर जवाब भी मांगा है। उइके की ओर से अधिवक्ता अश्विनी दुबे ने दलील दी कि न तो अनुशासनात्मक जांच हुई और न ही ठोस सबूत, फिर भी एसआई को दोषी ठहराया गया। हाईकोर्ट का हस्तक्षेप
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने मृत्युदंड पलट दिया। बेंच ने कहा कि जांच अत्यंत लापरवाह, दुर्भावनापूर्ण और गुमराह करने वाली थी। इससे एक निर्दोष व्यक्ति को 3.5 साल जेल में रहना पड़ा।” इसी आधार पर हाईकोर्ट ने जांच अधिकारी चैन सिंह उइके पर ₹1,00,000 का जुर्माना लगाया और उनके खिलाफ प्रतिकूल टिप्पणियां दर्ज कीं। अब जानिए सुप्रीम कोर्ट कहां असहमत हुआ यह था पूरा मामला
बालाघाट में राजीव सागर बांध की नहर से 4 अप्रैल 2022 को दो बच्चियों के शव मिले थे। ये दोनों 5 और 3 वर्ष की थी। पुलिस ने चाचा पर शक जताकर उसे गिरफ्तार किया और 2024 में मौत की सजा दिलाई। हाईकोर्ट ने जांच को लापरवाही और दुर्भावनापूर्ण बताया। अदालत के अनुसार आरोपी ने साढ़े तीन साल निर्दोष होकर जेल में बिताए, इसलिए उसकी सजा रद्द कर एसआई पर 1 लाख रुपए का जुर्माना लगाया। मामले से जुड़ीं ये खबरें पढ़िए.. 1. बालाघाट में दो सगी बहनों की मौत:राजीव सागर बांध बड़ी नहर में मिले 3-5 साल के बच्चियों के शव 2. मौत का समय, दुष्कर्म की आशंका…आरोपी के नाम में चूक:ताऊ को लोअर कोर्ट से फांसी लेकिन हाईकोर्ट से बरी, अदालत ने पुलिस पर उठाए सवाल 3. ताऊ उठा ले गया…और मार डाली 2 भतीजियां, लाल पोटली में बंद फोटो फ्रेम का क्या था राज ?


