गंगानगरी गाजर से 3 महीने में 100 करोड़ का कारोबार:बिहार, पंजाब सहित कई राज्यों में डिमांड; डेली 20 क्विंटल से ज्यादा की मंडी में सप्लाई

देशभर में मशहूर राजस्थान के श्रीगंगानगर की गाजर डिमांड में है। श्रीगंगानगर की साधुवाली मंडी में रोजाना 20 हजार क्विंटल गाजर बिकने को आ रही है। यहां से पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, हिमाचल, जम्मू, बिहार और पश्चिम बंगाल सहित 20 राज्यों में इसकी सप्लाई हो रही है। सबसे ज्यादा डिमांड बिहार और बंगाल में है। आम गाजर से अधिक लंबाई, गहरा लाल रंग और अधिक मिठास इस गाजर की पहचान है। यहां मंडी में आए किसानों का दावा है कि- सिर्फ 3 महीने सीजन में 100 करोड़ का कारोबार हो जाता है। खेती किसानी में इस बार पढ़िए श्रीगंगानगर के गाजर की कहानी… इस बार अच्छे भाव की उम्मीद एक जैड के रहने वाले किसान श्यामलाल जांगू (45) ने बताया- 1988 से 15 बीघा जमीन पर वह गाजर की खेती कर रहे हैं। इस बार उम्मीद है कि गाजर की खेती अच्छा फायदा देकर जाएगी। इसके दो-तीन कारण हैं। एक जिले में बिजाई कम होना दूसरा पड़ोसी राज्य पंजाब में बाढ़ के कारण गाजर का उत्पादन नहीं होना। तीसरा पिछली बार जिले में गाजर का बंपर उत्पादन होने से किसानों को भाव नहीं मिले थे। श्यामलाल ने बताया- एक बीघा से 90 से 100 क्विंटल तक की गाजर निकल जाती है। इसी तरह 15 बीघा से 14 से 15 लाख का मुनाफा हो जाता है। गाजर की खेती में ज्यादा खर्चा भी नहीं है, सिर्फ बीज का खर्चा लगता है। 20 रुपए प्रति किलो का भाव मलकाना खुर्द से गाजर मंडी में गाजर बेचने आए किसान बबल बराड़ (35) ने कहा- इस बार गाजर के भाव अच्छे मिल रहे हैं। मंडी में 20 रुपए प्रति किलो के हिसाब से गाजर खरीद बिक रही है। उन्होंने 5 बीघा में गाजर की खेती की है। भाव अच्छे मिलने से इस बार काफी प्रॉफिट होगा। मंडी में गाजर के ट्राली लेकर आए किसान सुशील विश्नोई (40) ने बताया- उनके पास कालूवाला में 13 बीघा में गाजर की खेती है। मौसम अनुकूल रहने से इस बार गाजर का उत्पादन काफी अच्छा है। यहां कि गाजर में पेस्टिसाइड्स व फर्टिलाइजर का उपयोग भी बहुत कम होता है। जिसकी वजह से गाजर में अधिक मिठास होती है। धुलकर हो जाती है गहरी लाल गाजर की प्रोसेसिंग गंगनहर नहर किनारे लगी धुलाई यूनिटों पर होती है। यहां सैकड़ों मशीनें लगी हुई हैं। किसान खेत से निकालकर गाजर लाते हैं तो इस पर मिट्टी लगी होती है। रंग भी सुर्ख लाल नजर नहीं आता। यहां गाजर मंडी गांव साधुवाली में है। इलाके के गांव साधुवाली, तीन पुली से साधुवाली की तरफ आने वाली नहर, गांव कालूवाला के पास गंगनहर सहित गंगनहर के कई हिस्सों के पास लोगों ने मशीनें (धुलाई यूनिट) लगा रखी हैं। इन मशीनों पर इन गाजर की धुलाई की जाती है। धोने के बाद इन गाजरों का रंग निखर जाता है। मशीन से बाहर आते ही इन्हें बोरियों में पैक करवा दिया जाता है। मौके पर ही किसान इसकी बोली करवाने के बाद लोडिंग भी करवा देते हैं। अब तस्वीरों में समझिए गंगानगरी गाजर की कहानी… 1. खेत को नम कर गाजर तोड़ते किसान 2. ट्रैक्टर में लदी ताजा गाजर 3. नहर के पास मशीनों पर धुलाई 4. बिकने को तैयार 100 किलोमीटर के एरिया में गाजर इलाके में 10 हजार हेक्टेयर में गाजर का रकबा है। मंडी के चारों तरफ 100 किलोमीटर के घेरे में गाजर होती है। श्रीगंगानगर के अलावा हनुमानगढ़, पंजाब के हरियाणा के संगरिया तक की गाजर यहां मंडी में आती है। राजस्थान में अमेरिका-ब्राजील के फ्रूट की खेती: 63 साल के किसान ने सीखा खेती का तरीका, 15 दिन तक नहीं होता है खराब अमेरिकी और ब्राजील के फलों ने एक बुजुर्ग किसान की जिंदगी बदल दी। कई दशकों तक पारंपरिक खेती करने वाले किसान को कभी अंदाजा ही नहीं हुआ कि खेती में एक छोटा सा बदलाव उसके मुनाफे को कई गुना बढ़ा सकता है। (पढ़ें पूरी खबर)

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