सागर कलेक्टर कार्यालय परिसर में नए भवनों के निर्माण के लिए पेड़-पौधों की कटाई की गई है। मामला हाईकोर्ट पहुंच गया है और कोर्ट ने इस पर संज्ञान लिया है। हस्तक्षेपकर्ता नितिन सक्सेना का कहना है कि उन्होंने भोपाल में पेड़ों की कटाई को लेकर जबलपुर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी। उसी दौरान उन्हें सागर में लगभग 1000 पेड़ काटे जाने की जानकारी मिली, जिसे उनके अधिवक्ता ने 26 नवंबर को हुई सुनवाई में कोर्ट के सामने रखा। इस मामले में डिविजनल बेंच ने सुनवाई में कहा कि सागर में हुई पेड़ों की कटाई को लेकर राज्य सरकार और प्रशासनिक अधिकारियों से पूछताछ की गई है। कोर्ट ने सागर कलेक्टर से यह स्पष्ट करने को कहा है कि किसकी अनुमति से पेड़ काटे गए और कुल कितने पेड़ हटाए गए। इसके लिए विस्तृत एफिडेविट मांगा गया है, जिसमें अब तक की गई पूरी कटाई का विवरण देना होगा। दरअसल, कोरोना काल साल 2020 में तत्कालीन कलेक्टर दीपक सिंह ने कार्यालय परिसर की 7 हजार वर्गफीट भूमि पर करीब डेढ़ हजार पौधे मियावाकी तकनीक से लगवाए थे। यह काम भोपाल की राम आस्था मिशन संस्था ने किया था और इस जंगल को ‘रामवन’ नाम दिया गया था। पूर्व गृहमंत्री भूपेंद्र सिंह ने इसका लोकार्पण किया था और इसे शहर का नया ऑक्सीजन बैंक बताया था। पांच साल में ये पौधे घने जंगल में बदल गए थे और लगभग एक हजार पेड़-पौधों का क्षेत्र तैयार हो गया था। जेसीबी से पेड़ हटाए, अब जंगल पूरी तरह खाली जंगल को कलेक्टर के निर्देश पर काटा गया। जेसीबी चलाकर पेड़-पौधों को नष्ट कर दिया गया, जिससे पूरा क्षेत्र अब वीरान हो गया है। कहा जा रहा है कि इस जमीन पर निर्वाचन कार्यों के लिए दो बड़े कक्षों का निर्माण किया जाएगा। इसी उद्देश्य से पेड़-पौधे हटाए गए हैं। इंडियन कॉफी हाउस खोलने दी जमीन कलेक्टर परिसर में जगह की कमी का हवाला देकर मियावाकी जंगल हटाया गया, ताकि नए कक्षों का निर्माण हो सके। वहीं दूसरी ओर परिसर में ही इंडियन कॉफी हाउस को करीब 15,000 वर्गफीट जमीन उपलब्ध कराई गई है। सवाल उठ रहा है कि अगर परिसर में जगह की कमी थी तो रेस्टोरेंट के लिए इतनी बड़ी जमीन देने की जरूरत क्यों पड़ी?


