उज्जैन के देशमुख अस्पताल पर इलाज में लापरवाही के कारण गर्भवती महिला और पेट में पल रहे शिशु की मौत का आरोप लगा है। परिजनों की शिकायत के बाद सीएमएचओ उज्जैन ने चार सदस्यीय डॉक्टरों की टीम बनाकर सात दिन के भीतर जांच रिपोर्ट देने के आदेश दिए हैं। साथ ही अस्पताल को भी नोटिस जारी किया गया है। इंजेक्शन लगाने के तुरंत बाद बिगड़ी हालत नीतेश यादव ने बताया कि उनकी पत्नी अंजली यादव (30) का प्रसवपूर्व उपचार नानाखेड़ा रोड स्थित देशमुख अस्पताल की संचालक व स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. स्नेहल देशमुख के यहां चल रहा था। गर्भ के नौवें महीने में 7 अक्टूबर 2025 को नियमित चेकअप के दौरान डॉक्टर ने खून की कमी बताकर आयरन के इंजेक्शन लगाने की सलाह दी। इसी दिन अस्पताल में डॉक्टर की निगरानी में अंजली को आयरन के दो इंजेक्शन लगाए गए, लेकिन इंजेक्शन से पहले स्टाफ ने कोई आवश्यक टेस्ट नहीं किया। इंजेक्शन लगने के कुछ देर बाद ही अंजली की तबीयत बिगड़ने लगी। स्थिति गंभीर होने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कर लिया गया। इंजेक्शन के दुष्प्रभाव के कारण 7 अक्टूबर की रात करीब 9 बजे अंजली के पेट में पल रही नवजात बच्ची की मौत हो गई। इसकी जानकारी अस्पताल स्टाफ ने अगले दिन 8 अक्टूबर की सुबह 4 बजे दी। 10 घंटे बाद किया गया ऑपरेशन परिजनों का आरोप है कि अंजली की हालत बिगड़ने पर डॉ. देशमुख द्वारा तुरंत ऑपरेशन किया जाना चाहिए था, लेकिन लापरवाही बरतते हुए डॉक्टर सुबह 8:30 बजे अस्पताल पहुंचीं और करीब साढ़े दस घंटे बाद ऑपरेशन किया गया। पेट से मृत बच्ची को निकालने के बाद भी अंजली की हालत और खराब होती चली गई। अंजली की गंभीर स्थिति के बावजूद उन्हें दूसरे बड़े अस्पताल रेफर नहीं किया गया और देशमुख अस्पताल के ही आईसीयू में भर्ती रखा गया। 10 अक्टूबर तक अंजली को आईसीयू में रखा गया और लगभग 8 यूनिट खून चढ़ाया गया। 14 अक्टूबर को स्थिति सामान्य बताकर अंजली को डिस्चार्ज कर दिया गया। अस्पताल ने लगभग 1.50 लाख रुपए का बिल लिया। दूसरे अस्पताल में खुला लापरवाही का मामला घर लौटने के बाद जब परिजनों ने अन्य चिकित्सकों से परामर्श लिया, तो पता चला कि अंजली को एक ही दिन में दो आयरन इंजेक्शन बिना परीक्षण लगाए गए, जिसका सीधा असर उनकी किडनी और हार्ट पर पड़ा था। यही कारण नवजात की मौत और अंजली की तबीयत बिगड़ने का प्रमुख कारण बताया गया। 13 नवंबर को सुबह 8:30 बजे अंजली की तबीयत फिर बिगड़ी और उन्हें दूसरे निजी अस्पताल में भर्ती किया गया। जांच में चिकित्सकों ने हार्ट में ब्लड क्लॉट जमने की स्थिति बताई। ICU और वेंटिलेटर पर रखने के बावजूद अंजली को बचाया नहीं जा सका। डॉक्टरों ने मेडिकल रिकॉर्ड देखने के बाद साफ कहा कि गलत तरीके से आयरन इंजेक्शन लगाने और इलाज में लापरवाही के कारण ही यह स्थिति बनी। चार सदस्यीय जांच समिति गठित शिशु और प्रसूता की मौत के मामले में यादव परिवार ने 16 नवंबर को सीएमएचओ से शिकायत की। इसके बाद सीएमएचओ ने डॉ. जितेंद्र राजपूत, डॉ. आर.के. पाल, डॉ. आभा सूर्यवंशी और डॉ. कपिल व्यास की चार सदस्यीय टीम गठित कर 30 नवंबर तक जांच रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं। सीएमएचओ अशोक पटेल ने कहा- हमने जांच के आदेश दे दिए हैं। रिपोर्ट आने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।


