बालोतरा में पुलिस ने तस्कर का 14 किमी तक पैदल पीछा किया और गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार के समय तस्कर के हाथ में लोडेड पिस्टल भी बरामद हुई। आरोपी नाकाबंदी तोड़कर भागने लगा तो पुलिस ने पीछा किया। आरोपी की स्कॉर्पियो से करीब 40 लाख का 508 किलोग्राम डोडा पोस्त बरामद हुआ है। एसपी रमेश ने बताया कि डीसीआरबी से सूचना मिली कि स्कॉर्पियो में भारी मात्रा में अवैध डोडा पोस्त नवतला से परेऊ की ओर ले जाया जा रहा है। सूचना पर डीएसटी बालोतरा और गिड़ा थाना पुलिस ने परेऊ के पास नाकाबंदी की। संदिग्ध स्कॉर्पियो चालक ने नाकाबंदी तोड़ी और तेज गति से भगाने लगा। झाड़ियों में घुसा और पैदल भागा
इस दौरान वाहन के टायर की हवा निकलने के बाद भी उसने स्कॉर्पियो को करीब 3 किमी दूर तक भगाया। सुनसान रास्ते पर स्कॉर्पियो छोड़कर झाड़ियों में घुस गया और पैदल भागने लगा। 14 किलोमीटर पैदल पीछा किया
अंधेरे, कंटीली तारों, रेतीले धोरों और घनी झाड़ियों के बीच पुलिस टीम ने तस्कर का लगभग 14 किलोमीटर तक पीछा किया। भागते समय तस्कर कंटीली तारों में उलझ गया। जिससे उसकी उसकी पैंट तक फट गई। जब पुलिस ने उसे घेरा, उसके हाथ में लोडेड पिस्टल थी। 25 कट्टों में भरा था 508 किलो डोडा पोस्त
स्कॉर्पियो की तलाशी में 25 कट्टों में भरा 508.110 किलोग्राम अवैध डोडा पोस्त, फर्जी नंबर प्लेट और आरोपी के कब्जे से लोडेड पिस्टल व चार जिंदा कारतूस बरामद किए गए। गिड़ा थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर तस्करी नेटवर्क की गहन जांच शुरू कर दी है। अलग-अलग थानों में सात प्रकरण दर्ज हैं
गिरफ्तार आरोपी प्रेम प्रकाश पुत्र चुनाराम जाट निवासी बेरीवाला कुंडला पर अलग-अलग जिलों में सात प्रकरण दर्ज है। वर्ष 2019 में बाड़मेर जिले के उत्तरलाई के पास चोरी की फॉर्च्युनर चलाते समय उसने बाइक को जोरदार टक्कर मार दी थी। जिसमें व्याख्याता जगदीश सारण, उनकी माता कस्तूरी देवी और दोनों बच्चे गोविंद व सरस्वती की दर्दनाक मौत हो गई थी। हादसे के समय फॉर्च्यूनर में भी डोडा पोस्त भरा हुआ था और पलटने पर मादक पदार्थ सड़क पर फैल गया था। प्रेम प्रकाश सदर बाड़मेर, नागाणा सिणधरी, बाड़मेर ग्रामीण, फलसूंड जैसलमेर, नीमच सिटी (मध्य प्रदेश) सहित कई थाना क्षेत्रों में वांछित रह चुका है। प्रारंभिक पूछताछ में उसने कबूल किया कि वो मध्यप्रदेश में तस्करी के केस में 3 वर्ष तक जेल में रह चुका है और रिहा होने के बाद फिर से तस्करी में सक्रिय हो गया। वो एक चक्कर के बदले 25,000 रुपए लेकर तस्करी कर रहा था और बड़े तस्करों के साथ संगठित नेटवर्क का हिस्सा बन चुका था। इस ऑपरेशन में उप निरीक्षक लूणाराम, कॉन्स्टेबल उदयसिंह व धर्मेंद्रसिंह (डीएसटी), कॉन्स्टेबल सुरेंद्रसिंह व मिश्रेखान (साइबर सेल), कॉन्स्टेबल शम्भुसिंह, डीएसटी चालक कॉन्स्टेबल मुकेश कुमार की महत्वपूर्ण भूमिका रही। विशेष रूप से हेड कॉन्स्टेबल गोमाराम और डीसीआरबी कॉन्स्टेबल मोहनलाल ने निर्णायक भूमिका निभाई।


