नगर निगम सिंगरौली सफाई व्यवस्था पर हर महीने लगभग 1 करोड़ 30 लाख रुपए खर्च करने का दावा करता है। निगम का कहना है कि शहर की सभी गलियों में प्रतिदिन सफाई होती है, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों के विपरीत है। ताजा मामला वार्ड नंबर 42 के थाना रोड का है। यह क्षेत्र कथित तौर पर वीआईपी इलाकों में शामिल है, लेकिन यहां की गलियां कचरे के ढेर में तब्दील हो गई हैं। स्थानीय निवासी खुद झाड़ू उठाकर अपनी गलियां साफ करने को मजबूर हैं। वार्ड की इसी गली में रहने वाले मनोज कुमार शाह ने बताया कि यहां कभी नियमित सफाई नहीं होती। उन्होंने कहा कि महीनों से गली में न तो सफाईकर्मी दिखाई देते हैं, न ही कोई वाहन आता है। जब भी समय मिलता है, हम खुद सफाई करते हैं। निगम सिर्फ कागजों में सफाई दिखा रहा है। प्रभारी बोले रोज हो रही सफाई इस संबंध में दैनिक भास्कर ने स्वच्छता प्रभारी बालगोविंद चतुर्वेदी से बात की। उन्होंने दावा किया कि शहर की सभी सड़कों और गलियों में हर रोज झाड़ू लगता है। “आपके द्वारा बताए गए वार्ड की स्थिति की जांच कराई जाएगी। यदि किसी की लापरवाही पाई जाती है तो उस पर कार्रवाई होगी। सफाई अभियान निरंतर जारी रहेगा।” नगर निगम की करोड़ों रुपए की खर्चीली सफाई व्यवस्था के बावजूद वार्ड-42 की यह स्थिति बताती है कि कागजों पर चल रहा सफाई अभियान हकीकत में प्रभावी नहीं है। शहर की जनता अब भी स्वच्छ वातावरण की प्रतीक्षा कर रही है।


