NPCI भारत बिलपे ने नेटबैंकिंग 2.0 लॉन्च किया है। इस पेमेंट सेटलमेंट सिस्टम का नाम बैंकिंग कनेक्ट है। ये नेट बैंकिंग पेमेंट्स को आसान बनाने पर फोकस्ड है। ये सिस्टम कस्टमर्स को डायरेक्ट उनकी बैंकिंग एप पर ले जाकर ट्रांजेक्शन पूरा करता है। QR कोड से पेमेंट ऑप्शन भी मिलता है। इस सिस्टम में पहले की तरह वेबपेज पर ID-पासवर्ड भरने का नहीं है। कई बार यूजर्स को लॉगिन ID-पासवर्ड भूल जाते हैं, जिससे पेमेंट बीच में रुक जाता है। इसी को ध्यान में रखते हुए नेटबैंकिंग 2.0 डेवलप किया गया है। ये नया प्लेटफॉर्म मोबाइल-फर्स्ट अप्रोच पर बना है। बैंकिंग कनेक्ट इस्तेमाल करने की प्रोसेस तीन तरीके से पेमेंट की चॉइस मिलेगी, AI से सिक्योरिटी कंपनी की MD और CEO नूपुर चतुर्वेदी ने बताया कि नेटबैंकिंग 2.0 के आने से कस्टमर्स को पेमेंट करने के तीन ऑप्शंस मिलेंगे। बैंक ऐप यूज करना, QR कोड स्कैन करना या पुरानी वेबसाइट पर जाना (अगर बैंक माइग्रेट नहीं हुआ हो)। इससे यूजर्स को पेमेंट करने की चॉइस मिलेगी। नेटबैंकिंग सुरक्षा पर खास फोकस है। AI और ML टेक्नोलॉजी से फ्रॉड मैनेजमेंट सिस्टम बनाया गया है, जो संदिग्ध ट्रांजेक्शन को स्पॉट करके बैंक को अलर्ट भेजेगा। चतुर्वेदी ने बताया, “हम नई टेक्नोलॉजीज का इस्तेमाल कर रहे हैं ताकि फ्रॉड को जल्दी पकड़ा जा सके। इंश्योरेंस प्रीमियम, फीस जैसे पेमेंट में काम आएगा नया सिस्टम नूपुर चतुर्वेदी ने कहा- इस नई सुविधा का इस्तेमाल करने वाले कस्टमर्स मुख्य रूप से दो तरह के होंगे। पहले – बिजनेस वाले, जो बहुत बड़ी वैल्यू के पेमेंट्स करते हैं। जैसे टैक्स भरना, इंश्योरेंस प्रीमियम देना या दूसरी हाई-वैल्यू पेमेंट्स। दूसरे – आम लोग, जो बड़े अमाउंट के ट्रांजैक्शन करते हैं, जैसे कॉलेज की फीस भरना, स्टॉक या म्यूचुअल फंड में इन्वेस्टमेंट करना वगैरह…” नेटबैंकिंग से हर महीने करीब 30 करोड़ ट्रांजैक्शन हो रहे चतुर्वेदी ने कहा कि कंपनी किसी नंबर के टारगेट पर फोकस नहीं कर रही, बल्कि ये देख रही है कि जितने ज्यादा बैंक और पेमेंट प्लेयर्स इस नए सिस्टम से जुड़ें। उनके मुताबिक, जितने ज्यादा लोग जुड़ेंगे, कस्टमर्स का कॉन्फिडेंस उतना ही बढ़ेगा और पूरा पेमेंट नेटवर्क मजबूत होगा। उन्होंने बताया कि अभी नेटबैंकिंग से हर महीने करीब 30 करोड़ ट्रांजैक्शन हो रहे हैं और उम्मीद है कि आने वाले समय में ये नंबर और ऊपर जाएगा। ग्रोथ की मुख्य वजह ग्रामीण इकोनॉमी का रेजिलिएंट रहना है। एग्रीकल्चरल आउटपुट बेहतर होने से रूरल स्पेंडिंग बढ़ी। इसे एक उदाहरण से समझते हैं। कल्पना कीजिए, एक किसान के खेत में इस बार अच्छी फसल हुई, तो साबुन से लेकर स्मार्टफोन तक की खरीदारी बढ़ गई। यही ग्रामीण डिमांड है, जो GDP का 60% हिस्सा है। दूसरी तरफ, फैक्ट्रीज में मशीनें जोर-शोर से चल रही हैं। मैन्युफैक्चरिंग 9.1% ग्रोथ दिखाई, जो पिछले साल के 2.2% से कहीं बेहतर। गवर्नमेंट ने कैपिटल एक्सपेंडिचर पर 31% ज्यादा खर्च किया – रोड्स, ब्रिजेस और इंफ्रा पर। एक्सपोर्ट भी 8.8% ऊपर, US टैरिफ्स से पहले शिपमेंट्स ने मदद की। लेकिन पूरी कहानी इतनी चमकदार नहीं। अर्बन डिमांड अभी भी थोड़ी सुस्त, प्राइवेट कैपेक्स 7.3% पर रुका। एग्रीकल्चर सिर्फ 3.5% बढ़ा, माइनिंग में 0.04% की सिकुड़न। फिर भी, टर्शियरी सेक्टर (सर्विसेज) ने 9.2% ग्रोथ से बैलेंस किया। रियल GVA 8.1% ऊपर, नॉमिनल GDP 8.7%। लोगों ने ज्यादा खर्च किया, इसलिए GDP बढ़ी हमारी पूरी अर्थव्यवस्था (GDP) में लगभग 60% हिस्सेदारी हम आप जैसे आम लोगों की है। इसे प्राइवेट कंजम्प्शन कहते हैं। यानी आपने जो नया फोन खरीदा, बच्चों की स्कूल फीस भरी, बाइक की EMI दी, किराने का सामान लिया– ये सारा पैसा मिलाकर प्राइवेट कंजम्प्शन बना। पिछले क्वार्टर (जुलाई-सितंबर 2025) में इस खर्च की रफ्तार पिछले साल के 6.4% से बढ़कर 7.9% हो गई। पिछले साल इसी समय लोग थोड़ा कंजूसी कर रहे थे, लेकिन इस बार गांव-शहर दोनों जगह लोग खुलकर खर्च करने लगे। नतीजा? ये 60% हिस्सा वाला इंजन फिर से फुल स्पीड पर दौड़ने लगा। कंजम्प्शन के अलावा, मजबूत इकोनॉमिक परफॉर्मेंस की वजह मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की ग्रोथ है। ये दूसरी तिमाही में 9.1% रही, जबकि पिछले साल इसी पीरियड में यह सिर्फ 2.2% थी।


