कांग्रेस में ‘संगठन मंत्री’ की नियुक्ति पर प्रभारी को एतराज:हरीश चौधरी का तर्क- ये RSS का पदनाम, अब महासचिव के नाम से फिर होगी घोषणा

एमपी कांग्रेस में जिला संगठन मंत्रियों की नियुक्तियों पर विवाद हो गया है। इन नियुक्तियों पर कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी ने रोक लगा दी है। दरअसल, पिछले पांच दिनों में इंदौर, उज्जैन, धार और जबलपुर में जिला संगठन मंत्री नियुक्त किए गए थे। “जिला संगठन मंत्री” के पदनाम को लेकर कांग्रेस में अंदरखाने कुछ सीनियर नेताओं ने शिकायत की। इसके बाद प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी ने पत्र जारी कर जिला संगठन मंत्रियों की नियुक्तियों पर रोक लगा दी। हरीश चौधरी का पत्र पढ़िए…
जीतू पटवारी को भेजे पत्र में प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी ने लिखा- राज्य के कुछ जिलों में प्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा पूर्व अनुमति के बिना किए गए जिला संगठन मंत्रियों के नियुक्तियों को तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाता है। साथ ही यह भी निर्देशित किया जाता है कि भविष्य में ऐसी किसी भी नियुक्ति से पहले एक औपचारिक प्रस्ताव तैयार कर अनुमोदन के लिए भेजा जाए और अनुमोदन प्राप्त होने के बाद ही नियुक्ति की जाए। चौधरी का तर्क- “संगठन मंत्री” आरएसएस का नाम, कांग्रेस का नहीं जिला संगठन मंत्री की नियुक्तियों पर रोक लगाने वाले पत्र को लेकर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी की मीटिंग के बाद कहा- इस पर बात हुई है। चूंकि, हरीश जी का ये कहना था कि संगठन महासचिव होना चाहिए। जो कांग्रेस में हमेशा से परंपरा रही है। तो किसी विवाद और आपत्ति नहीं है। उनका कहना था कि संगठन मंत्री ये आरएसएस का शब्द है, ये कांग्रेस का नहीं है। उनकी नियुक्ति कांग्रेस महासचिव के रूप में रहेगी बस इतनी सी बात है। चौधरी से पूछा तो बोले- ये हमारा इंटरनल मैटर
भास्कर ने कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी से पूछा कि जिला संगठन मंत्री की नियुक्ति को क्यों रद्द किया गया ? तो उन्होंने कहा- नियुक्तियां रद्द करने का कारण कांग्रेस की आंतरिक प्रक्रिया है। उसे मीडिया के सामने साझा करने की आवश्यकता नहीं हैं। कोई न कोई कारण होंगे। लेकिन, कारण जाहिर करना आतंरिक तौर पर संगठन की व्यवस्था नहीं हैं। चौधरी ने कहा- कुछ न कुछ त्रुटि रही होगी। उसमें सुधार हो जाएगा तो आपको अपने आप पता चल जाएगा। पत्र हम लोगों ने तो सार्वजनिक किया नहीं। प्रेस नोट के माध्यम से तो आया नहीं। आपको कहीं से पत्र मिला है। ये आंतरिक दस्तावेज हैं। इंटरनल प्रक्रिया है। पार्टी के अंदर नियम प्रक्रिया के आधार पर फैसले होते हैं। नियुक्ति तो संगठन में आने वाले वक्त में होगी। व्यक्ति हमारे संगठन में मायने नहीं रखता लेकिन तय प्रक्रिया के तहत नियुक्ति होगी। कमलनाथ के समय बनाए गए थे संगठन मंत्री
पूर्व सीएम कमलनाथ के प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रहते हुए 2022 में जिला संगठन मंत्रियों की नियुक्ति की गई थी। एमपी के सभी संगठनात्मक जिलों में संगठन मंत्री नियुक्त किए गए थे। गुरमीत सिंह मंगू को संगठन मंत्रियों का प्रभारी नियुक्त किया गया था। विश्वास सारंग बोले- कांग्रेस में पद की गरिमा का कोई महत्व नहीं कांग्रेस में जिला संगठन मंत्रियों की नियुक्तियों पर मचे विवाद पर खेल मंत्री विश्वास सारंग ने कहा- कांग्रेस में पद की गरिमा का कोई महत्व नहीं हैं। जब खरगे जी को सोनिया जी, राहुल जी और प्रियंका जी के नॉमिनेशन फाइल करते वक्त कमरे में आने के लिए अनुमति लेनी पड़ती हो। तो फिर प्रदेश अध्यक्ष की क्या औकात। जब राष्ट्रीय अध्यक्ष ही बद से बदतर स्थिति में हैं तो फिर प्रदेश अध्यक्ष की गरिमा की अपेक्षा कैसे कर सकते हैं क्या? गुट और गिरोह में बंटी कांग्रेस केवल और केवल नेहरू परिवार की चमचागिरी पर आधारित है। इसमें अनुशासन, कैडर बेस्ड वर्किंग की अपेक्षा नहीं करनी चाहिए।

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