लैब टेक्नीशियन प्राइवेट गाडी से मरीज को डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल लेकर आ रहे थे। बीच रास्ते में हार्ट अटैक आने से मौत हो गई। मामला बाड़मेर जिले के रानीगांव हॉस्पिटल (सीएचसी) का है। शुक्रवार को लैब टेक्नीशियन का पोस्टमॉर्टम करवाकर शव उनके परिजनों को सुपुर्द किया गया। सरपंच का कहना है कि उन्होंने अपने अनुभव से ऐसे लोगों का इलाज करते थे जिनको बड़े-बड़े हॉस्पिटलों के डॉक्टर हाथ खड़े कर देते थे। हमारे पूरे गांव में चूल्हा नहीं जला। पूरे गांव शोक में डूबा नजर आया। वहीं मॉर्च्युरी में नम आंखों से लैब टेक्नीशियन को विदाई दी। दरअसल, सीकर जिले निवासी मनमोहनसिंह 1994 में रानीगांव में लैब टेक्नीशियन के रूप में पोस्टिंग हुई थी। 31 सालों से गांव में अपनी दे रहे थे। 24 घंटे तक लोगों की सेवा के लिए तत्पर रहते थे। गुरुवार शाम को रानीगांव में मरीज की हालात खराब होने पर उसे खुद साथ में चलकर बाड़मेर हॉस्पिटल लेकर आ रहे थे। गडरारोड ओवरब्रिज के पास गाड़ी में बैठे-बैठे अचानक बेहोश हो गए। ड्राइवर व उनके साथ में बैठे लोगों को कुछ समझ में नहीं आया। वहां से बाड़मेर हास्पिटल लेकर आए। वहां पर डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। वहीं शव को हॉस्पिटल की मॉर्च्युरी में रखवाया गया। सरपंच उगमसिंह रानीगांव ने बताया- शुक्रवार को उनके परिजनों के आने के बाद मनमोहनसिंह का पोस्टमार्टम करवाकर शव परिजनों को सुपुर्द कर दिया गया। उनकी मृत्यु हार्ट अटैक से हुई है। ग्रामीणों ने बताया कि मनमोहन सिंह लैब टेक्नीशियन होने के बावजूद भी बेहद अनुभवी थे जिसके चलते हुए ऐसे लोगों का भी इलाज करते थे जिनको बड़े-बड़े हॉस्पिटलों के डॉक्टर हाथ खड़े कर देते थे। गांव के लोगों का मनमोहन सिंह से बड़ा जुड़ाव था ग्रामीणों ने बताया कि उनके निधन की खबर के बाद से ही गांव में चूल्हा तक नहीं जला है। ग्रामीणों ने मनमोहन सिंह के निधन पर शोक संवेदनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि गांव के लोग उनकी सेवाओं को कभी नहीं भूल पाएंगे।


