शहर के नांन्ता थाना क्षेत्र में बूंदी रोड पर बाई मुख्य नहर में एक युवक कल शाम को बह गया था। जिसका शव आज सुबह घटना स्थल से आधा किलोमीटर की दूरी पर नहर की घास में फंसा हुआ मिला। नगर निगम की 10 से 12 लोगो की गोताखोरो की टीम ने सुबह 8 से सर्च अभियान चलाया। पांच गोताखोर नहर में डेढ़ घंटे तक युवक के शव की तलाशी करते हुए आधा किलोमीटर दूर पहुंचे। नहर की झाड़ियों में युवक का शव फंसा हुआ था जिसका रेस्क्यू कर बाहर निकाला। मौके पर परिवार का रो-रो कर हुआ बुरा हाल। मृतक के भाई लोकेश ने बताया कि कल शाम मजदूरी कर गिरधरपुरा घर लौट रहे थे। रास्ते में नहर पर नहाने के लिए रुके थे। महेंद्र का पैर फिसल गया वह डूबने लगा। जिसे देख मैं उसे बचाने के लिए नहर में कूदा महेंद्र ने मुझे पकड़ लिया मैं भी डूबने लगा। वहां मौजूद लोगों ने रस्सी फेक मुझे तो बचा लिया पर महेंद्र नहर के बहाव में बह गया और डूब गया आज सुबह उसका शव मिला है। नगर निगम गोताखोर विष्णु श्रृंगी ने बताया कि कल शाम सूचना मिली दो भाई की नहर में डूबने की सूचना मिली था। एक भाई को तो वहां मौजूद लोगों ने रस्सी फेक बचा लिया था दूसरा बह गया था। निगम की टीम ने मोके पर रेस्क्यू अभियान चलाया गया था। अंधेरा होने के कारण रेस्क्यू रोक दिया। आज सुबह 8 बजे से ही रेस्क्यू अभियान चलाया गया। डेढ़ घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद घटनास्थल से आधा किलोमीटर की दूरी पर युवक का शव झाड़ियों में फंसा हुआ मिला जिसका रेस्क्यू कर निकाला गया। नांन्ता थाना के हेड कांस्टेबल मोरध्वज ने बताया कि शुक्रवार शाम को दो भाई महेंद्र (23)ओर लोकेश बायी मुख्य नहर में हाथ पैर धोने रुके थे। अचानक महेंद्र का पैर फिसलने से वो नहर में गिर गया। उसे डूबता देख छोटा भाई लोकेश उसे बचाने गया तो वह भी बहाव में बहने लगा। वहा मौजूद लोगो ने लोकेश को तो बचा लिया। महेंद्र पानी मे डूब गया। आज सुबह निगम गोताखोर टीम ने रेस्कयू किया। रेस्कयू अभियान के बाद महेंद्र के शव को घटना स्थल से 500 मीटर दूरी से निकाला गया। सर्च अभियान कल भी चलाया गया था। अंधेरा होने से सर्च अभियान रोक दिया गया था। आज सुबह दोबारा से नगर निगम के गोताखोरों की टीम ने नहर में सर्च अभियान चलाकर युवक के शव को बाहर निकाला गया। शव को मोर्चरी पर रखवाया गया है। शव का पोस्टमार्टम कर परिजनों को सौप दिया जाएगा। पुलिस मामले की जांच कर रही है। मृतक और उसका भाई बूंदी जिले के बासी गांव से कोटा में मजदूरी करने के लिए आए थे। यहां पर गिरधरपुरा इलाके में किराए के मकान पर रहते थे।


