वैशाली नगर और उसके आसपास की 150 कॉलोनियों के बरसात के पानी की निकासी के लिए 48 करोड़ की लाइन डाली गई है। यह पानी सिरसी रोड-नीमेडा की तलाई में छोड़ा जा रहा है। लेकिन तलाई के आगे के बहाव क्षेत्र में भू-माफियाओं ने बेखौफ कॉलोनियां काटकर बेच दी। स्थानीय लोगों ने जेडीए और जिला प्रशासन को कई बार सूचना दी, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। दैनिक भास्कर टीम ने मौके पर देखा कि तलाई अभी कच्ची है, लेकिन इसके आस-पास लगातार नई कॉलोनियां बन रही हैं। तलाई के आगे का प्राकृतिक बहाव क्षेत्र भी अवैध निर्माणों और कॉलोनियों की चपेट में है। जमाबंदी खाता संख्या 89, ग्राम बिचपड़ी, पटवार हल्का नीमेडा, तहसील कालवाड़ के अनुसार कई खसरे सरकारी भूमि के रूप में दर्ज हैं। इनमें बड़ी भूमि गैर मुमकिन नदी और गैर मुमकिन रास्ता के रूप में चिह्नित है। इसके बावजूद इन बहाव क्षेत्रों पर कॉलोनियां काटकर करोड़ों रुपये में प्लॉट बेचे जा रहे हैं। राजस्व रिकॉर्ड में नदी की 10.62 हैक्टेयर भूमि सरकार के नाम दर्ज जमाबंदी प्रतिलिपि के अनुसार ग्राम बिचपड़ी में खसरा संख्या 8 को गैर मुमकिन नदी के रूप में दर्ज किया गया है (10.6230 हैक्टेयर)। अन्य कई खसरे गैर मुमकिन रास्ता और आवासीय प्रयोजन के सरकारी स्वामित्व में हैं। इसके बावजूद इन सरकारी बहाव क्षेत्रों पर कब्जा कर करोड़ों के प्लॉट बेचे जा चुके हैं। लोगों का विरोध, दबंगों ने धमकाया
इलाके के लोग बताते हैं कि कई बार बहाव क्षेत्र में हो रहे अवैध निर्माण के खिलाफ विरोध किया गया। लिखित शिकायतें तहसीलदार और जिला प्रशासन को दी गईं, लेकिन कार्रवाई शून्य रही। उल्टा, शिकायत करने वालों को दबंगों ने धमकाना शुरू कर दिया। लोगों का कहना है कि 13 किलोमीटर दूर से पानी लाकर तलाई में छोड़ा जा रहा है, लेकिन तलाई के आगे का रास्ता बंद है। ऐसे में नीमेडा, मूंडिया रामसर और आसपास के गांवों में बाढ़ आने का खतरा बढ़ गया है। प्रशासन पानी ला रहा है, लेकिन आगे का बहाव सुरक्षित नहीं किया गया। प्रशासन की चुप्पी क्यों? “यह मामला हमारी नजर में है, आगे की कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। नदी के आगे के बहाव क्षेत्र को साफ करवाया जाएगा। संबंधित जोन के अधिकारी जांच कर रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं।”
-निशांत खंडेलवाल, एक्सईएन, नगर निगम


