प्रदेश में ब्यूरोक्रेसी और संगठन में बदलाव के बाद अब सत्ता की बारी है। दिसंबर के प्रथम सप्ताह के बाद से ही मंत्रिमंडल के विस्तार और बदलाव की उम्मीद है। मंत्रिमंडल विस्तार के बाद ही राजनीतिक नियुक्तियों का दौर शुरू हो जाएगा। बोर्ड-निगम से जुड़े 80 बड़े पदों पर नियुक्तियों का दौर चलेगा। कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में पहुंचे चेहरों को राजनीतिक नियुक्तियों में जगह मिलने की उम्मीद है। संगठन में ऐसे किसी चेहरे को जगह नहीं मिली है जो कांग्रेस छोड़कर आया हो। हालांकि कांग्रेस छोड़ने के बाद ज्योति मिर्धा पूर्व में भी संगठन में पद पर रह चुकी हैं। गौरतलब है कि प्रदेश में पंचायत और निकाय चुनाव होंगे और भजनलाल सरकार की वर्षगांठ भी है। ऐसे में सत्ता और संगठन की वर्किंग में तेजी लाने की दिशा में काम चल रहा है। इधर, बोर्ड-निगमों में बीजेपी से जुड़े कई बड़े चेहरों को जगह मिलेगी। इनमें पूर्व प्रदेशाध्यक्ष अशोक परनामी, पूर्व मंत्री राजपाल सिंह शेखावत, लक्ष्मीकांत भारद्वाज समेत कई नाम शामिल हैं। प्रदेश संगठन से जुड़ी 34 की सूची में 12 पदाधिकारी जयपुर से हैं। ऐसे में मारवाड़ के जिलों सहित कई जगहों पर पद नहीं मिलने से नाराज़गी है। पहला मौका जब कोई पदाधिकारी 5वीं बार रिपीट राजस्थान भाजपा में पहला मौका है जब किसी पदाधिकारी को पांचवीं बार पद मिला है। हालांकि इनसे पहले सीएम भजनलाल समेत कुछ नेता प्रदेश टीम में चार-चार बार रिपीट हुए थे। मुकेश दाधीच को 11वें साल भी संगठन में जिम्मेदारी मिली है। इससे पहले अशोक परनामी, मदनलाल सैनी, सतीश पूनिया, सी.पी. जोशी की टीम में संगठन मंत्री और उपाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी निभा चुके हैं। कांग्रेस से आने वाले चेहरों को भी पद का इंतजार विधानसभा और लोकसभा चुनाव के समय पूर्व केंद्रीय मंत्री लालचंद कटारिया, पूर्व मंत्री राजेंद्र यादव, पूर्व सांसद खिलाड़ी लाल बैरवा, विजयपाल मिर्धा, रिछपाल मिर्धा, ज्योति खंडेलवाल, सुरेश मिश्रा सहित कई छोटे-बड़े चेहरे बीजेपी में शामिल हुए थे। चर्चा है कि इनमें से कुछ नेताओं को सियासी नियुक्तियों का तोहफ़ा मिल सकता है।


