भिंड। संत के आसपास सकारात्मक ऊर्जा रहती है, क्योंकि संत भगवान को हृदय में धारण करके चलते हैं। इसलिए संत जहां भी दिखाई देते हैं, तो मनुष्य राधे-राधे और राम-राम जरूर बोलते हैं। उक्त वचन शुक्रवार को हनुमान महाराज सेंथियाधाम दुर्गा नगर में चल रही भागवत कथा में कथा व्यास आचार्य विनयकांत त्रिपाठी महाराज ने कहे। उन्होंने कहा कि इस संसार में मनुष्य झूठ बोलकर दूसरे मनुष्य को धोखा देकर अपने बच्चों के लिए पैसा कमाते हैं। इस तरह वह पैसा नहीं बल्कि पाप कमाते हैं। जो पैसा आप अपने बच्चों के लिए कमाते हैं वह पैसा ईमानदारी से कमाओ क्योंकि बच्चे पैसों को तो आपस में बांट लेंगे, लेकिन वह उस पाप को नहीं बाटेंगे। उन्होंने कहा कि संत को कभी छोटा बड़ा नहीं समझना चाहिए संत तो संत होते हैं संत तो बहुत बड़े महात्मा होते हैं। उन्होंने कहा कि आज मनुष्य की सबसे बड़ी समस्या भौतिकता की दौड़ में आध्यात्मिक मूल्यों का खो जाना है। लोग धन, पद और प्रतिष्ठा के पीछे भाग रहे हैं, लेकिन भीतर की शांति उनसे दूर होती जा रही है। संत हमें यह संदेश देते हैं कि भक्ति और सेवा बिना जीवन अधूरा है। जब मनुष्य स्वयं के भीतर भगवान को अनुभव करता है, तब उसका अहंकार समाप्त हो जाता है और जीवन सार्थक बन जाता है।


