सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट:आयड़ नदी के उफान से बिगड़ी मशीनें, एसटीपी ढाई महीने से बंद, निगम ने लिखी चिट्‌ठी, हिंदुस्तान जिंक के जवाब का इंतजार

आयड़ नदी पेटे में बना सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) नगर निगम को भारी पड़ रहा है। ढाई महीने पहले भारी बारिश के बाद नदी के उफान से प्लांट की मशीनें खराब हो गई थीं। तब यह बंद पड़ा है और सुधारा नहीं जा सका है। हालात ये हैं कि 5 मिलियन लीटर (50 लाख लीटर) सीवर ट्रीटमेंट की क्षमता वाले इस प्लांट से रोज 3 एमएलडी (30 लाख लीटर) पानी कलड़वास के प्लांट में भेजना पड़ रहा है। इसकी क्षमता 45 एमएलडी (45 लाख लीटर) की है। अब यह 35 से 39 एमएलडी गंदे पानी का ट्रीटमेंट कर रहा है। इससे पहले 32 से 36 एमएलडी का ट्रीटमेंट हो रहा था। सवाल पर निगम आयुक्त अभिषेक खन्ना ने माना कि ट्रीटमेंट प्लांट बंद है। यह भी बताया कि यहां आने वाले सीवेरज का पानी कलड़वास प्लांट में साफ करवा जा रहा है। गंदे पानी को खुले में नहीं छोड़ा गया है। प्लांट की मरम्मत और मशीनों को ठीक करवाने के लिए हिंदुस्तान जिंक को पत्र लिखा है। हालांकि अभी वहां से जवाब नहीं आया है। नदी पेटे में प्लांट बनाने पर उन्होंने कहा कि इसके लिए यूआईटी ने (अब यूडीए) ने करजाली कॉम्प्लेक्स के पास जमीन दी थी। उस इलाके में दूसरी जगह जमीन नहीं थी, इसलिए वहां प्लांट बनाया गया। रोज 7 करोड़ लीटर सीवरेज, 7.50 करोड़ के ट्रीटमेंट की व्यवस्था शहर में रोज करीब 70 एमएलडी (7 करोड़ लीटर) सीवरेज निकलता है। इसके सुधार के लिए साल 2019 में एसटीपी बनाने का काम शुरू हुआ था। हिंदुस्तान जिंक ने नगर निगम और शहरी विकास ट्रस्ट के साथ मिलकर 3 एसटीपी बनाए। इनमें कलड़वास में 45 एमएलडी, एफसीआई के पास 25 एमएलडी और करजाली कॉम्प्लेक्स के पास शहीद भगत सिंह नगर में 5 एमएलडी का प्लांट शामिल है। लागत 80 करोड़ रुपए थी। इसमें से 32 करोड़ राज्य सरकार और 48 करोड़ जिंक ने दिए थे। ये तीनों 7.50 करोड़ लीटर सीवरेज को ट्रीट कर सकते हैं। ऐसे काम करती है मशीनें

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