सीहोर स्थित वीआईटी यूनिवर्सिटी में 25-26 नवंबर को मारपीट और आगजनी की घटना के पीछे जो वजह बताई जा रही थी, वह सही निकली। 24 नवंबर को जिस बीटेक छात्रा नेहा साहूकार की बिलासपुर में मौत हुई थी, उसकी जान वीआइटी हॉस्टल के खराब खाने और पानी से हुई थी। यह आरोप नेहा के पिता सुनील साहूकार ने लगाया है। उन्होंने बताया कि नेहा कई बार शिकायत कर चुकी थी कि हॉस्टल में खाना और पानी अच्छा नहीं मिलता है। इसके चलते वह बीमार ही बनी रहती थी। अगस्त में उसकी तबीयत ज्यादा खराब रहने लगी। कई शिकायतें, पर मैनेजमेंट कुछ सुनने को तैयार नहीं था मैनेजमेंट कुछ भी सुनने को तैयार नहीं था। नेहा की तबीयत ज्यादा खराब हुई तो सुनील उसे बिलासपुर ले आए। जांच में पता चला उसे बॉउल ऑब्स्ट्रक्शन की परेशानी है। ये दूषित पानी व भोजन से होती है, इससे पाचन तंत्र खराब होता है। डॉक्टर बोले- नेहा को गंभीर प्रोग्रेसिव टीबी है। 10 दिन आईसीयू में संघर्ष करते हुए उसकी जान चली गई। फॉरेंसिक से पता चलेगी प्रोफेसर की मौत की वजह…
वीआईटी में इलेक्ट्रॉनिक्स के प्रोफेसर संग्राम केसरी दास की 26 नवंबर को हुई मौत की वजह पता नहीं चली है। सीहोर जिला अस्पताल के डॉ. आरके वर्मा के मुताबिक उनका बिसरा भोपाल स्थित फॉरेंसिक लैब भेजा गया है। पटना की छात्रा बीमार तो परिजनों ने आष्टा-इंदौर में कराया इलाज
पटना निवासी फर्स्ट ईयर की छात्रा और उनके परिजनों को वीआईटी प्रबंधन की तानाशही झेलनी पड़ी थी। हॉस्टल के खराब पानी और खाने के कारण छात्रा की तबियत अक्टूबर महीने में खराब हुई। सूचना मिलने पर छात्रा के माता-पिता वीआईटी यूनिवर्सिटी पहुंचे, पर प्रबंधन ने मां को भी हॉस्टल में नहीं जाने दिया। हॉस्टल की छात्राएं जैसे-तैसे उसे बाहर लेकर आईं। परिजनों ने उसे आष्टा के अस्पताल में भर्ती कराया, यहां उसे 90 से अधिक ग्लूकोज की बॉटल लगाई गईं। इसके बाद परिजन उसे इंदौर ले गया, यहां 15 दिन इलाज के बाद उसे राहत मिली। इसके बाद पांच दिन भोपाल के संत हिरदाराम नगर स्थित नेचुरअल थैरेपी सेंटर में रखा गया। 25 नवंबर को कैंपस में हुए विरोध प्रदर्शन के बाद छात्रा जैसे-तैसे दिल्ली पहुंची और यहां से पटना गई है। खुलकर सामने आने को तैयार नहीं छात्र
दूषित पानी और भोजन के कारण छात्रों के पीलिया समेत अन्य बीमारियों की चपेट में आने के बाद कैंपस में आगजनी के बाद जैसे-तैसे घर पहुंचे छात्र अस्पतालों में इलाज करवा रहे हैं। छात्रों ने बताया कि यदि उनकी पहचान सामने आ जाएगी तो एक्जाम समेत अन्य एकेडमिक गतिविधियों में उनका नुकसान किया जाएगा। ऐसा पहले भी हो चुका है। गेस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. प्रणव रघुवंशी के मुताबिक लगातार दूषित पानी-भोजन से इम्युनिटी प्रभावित होती है। कई छोटी बीमारियां बड़ा रूप ले लेती हैं। कमजोर पाचन तंत्र से शरीर ज्यादा प्रभावित होता है। टीबी जैसी बीमारी तक हो सकती हैं।


