प्रदेश में भूजल विभाग के निर्धारित 302 ब्लॉक में 213 ब्लॉक अत्यधिक शोषित श्रेणी में हैं। इसी तरह 23 ब्लॉक क्रिटिकल और 27 ब्लॉक सेमी क्रिटिकल हैं। सुरक्षित जल भंडार के लिहाज से सिर्फ 36 ब्लॉक ही हैं। ऐसे में कई जिलों का भूजल स्तर काफी नीचे चला गया है। बावजूद इसके किसानों को खेती के लिए मिलने वाले सोलर पंप अनुदान की स्कीम पुरानी ही चल रही है। सरकार की ओर से किसानों को 100 मीटर गहरे भूजल मिलने पर ही सोलर पंप लगाने के लिए सब्सिडी दी जा रही है। इससे नीचे गिरावट वाले क्षेत्रों के किसानों को योजना का लाभ नहीं मिल रहा है। वर्ष 2024 की तुलना में कई जगह भूजल स्तर बढ़ने में मामूली वृद्धि जरूर हुई है, लेकिन यह पूर्वी राजस्थान के जिलों में हुई है। मगर अलवर, बारां, बाड़मेर, भरतपुर, भीलवाड़ा, बीकानेर, बूंदी, चित्तौड़गढ़, चूरू, दौसा, धौलपुर, जयपुर, जैसलमेर, जालोर, झालवाड़, झुंझुनूं, जोधपुर, करौली, कोटा, नागौर, पाली और अजमेर जिलों में पानी का दोहन अत्यधिक हो रहा है। भूजल विभाग के आंकड़ों को देखें तो बीकानेर में नोखा, देशनोक, जैसलमेर के सम हाबूर, जोधपुर बावड़ी, भोपालगढ़, फलोदी के लोहावट, देचू, चूरू के सुजानगढ़, नागौर के जायल व बाड़मेर सहित कई ब्लॉक ऐसे हैं, जहां पानी 100 मीटर से लेकर 200 मीटर तक गहरा चला गया है। यहां के किसान चाहकर भी सोलर पंप के लिए आवेदन नहीं कर पा रहे हैं। अगर किसी ने आवेदन कर भी दिया हो तो उसकी फिजिबल रिपोर्ट के दौरान आवेदन निरस्त कर दिए जा रहे हैं। किसानों को कुसुम योजना के तहत सोलर पंप की लागत पर 60 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है। 3, 5, 7.5 व 10 एचपी के पंपों पर सरकार सीधे किसानों के खाते में सब्सिडी ट्रांसफर कर रही है। 100 मीटर से गहरा पानी खींचने में विफल हो रहे पंप विभागीय अधिकारियों का कहना है कि सोलर पंप अनुदान योजना 100 मीटर गहरे पानी के लिए ही बनाई गई है। जहां पानी गहराई में चला गया है, वहां के किसानों को इस स्कीम का फायदा नहीं दिया जा सकता। कारण ये पंप 100 मीटर गहराई से ही पानी खींचने में सक्षम हैं। जबकि किसान 100 मीटर का दायरा हटाने की मांग कर रहे हैं। खासकर पश्चिम राजस्थान के जिलों में सूरज की किरणें दिन में भी तेज रहने से पर्याप्त मात्रा में बिजली बन रही है।


