अवैध होर्डिंग:8 महीने में सिर्फ नोटिस 21 लाख तक की रिकवरी अब भी बाकी

एक तरफ तो नगर निगम शहर में प्रचार-प्रसार के आर्थिक स्रोतों पर नियंत्रण का अधिकार सालों से मांग रहा है। शहर के 7 ज़ोन में 50 से ज्यादा अवैध होर्डिंग लगी हैं। लगाने वाली भी वही फर्में हैं जिन्हें टेंडर दिया गया। परमिशन मिली 20 की, लगा ली 35 होर्डिंग। रिकवरी 21 लाख तक बन रही है। मगर कार्रवाई के नाम पर सिर्फ नोटिस भेजे जा रहे हैं। 8-8 महीने से फर्में पैसा जमा नहीं करा रही, पर निगम उन्हें पाल-पोश रहा है। लगता है निगम अवैध होर्डिंग के कारोबार को संरक्षित कर रहा है। दरअसल प्रचार के लिहाज से निगम को 7 ज़ोन में बांटा गया है। ज़ोन नंबर एक, दो, तीन और पांच नंबर एक फर्म को प्रचार के लिए मिला है। 7 नंबर ज़ोन दूसरी फर्म को मिला है और चार और छह नंबर ज़ोन तीसरी फर्म को मिला है। इन फर्मों में एक ऐसी फर्म है जिसे 20 साइटें लगाने का काम मिला, मगर उसने करीब 35 होर्डिंग लगा लीं। 20 लाख रुपए में इसे काम मिला। मगर जो अतिरिक्त 15 साइटों में होर्डिंग मिली, उसका कोई भुगतान नहीं किया गया। इसमें एक-दो महीने नहीं, बल्कि आठ महीने हो गए। निगम ने कार्रवाई के नाम पर सिर्फ नोटिस और डिमांड पत्र दिया। एक फर्म ऐसी है जिसे 48 साइटों पर प्रचार-प्रसार करना था, मगर उसने करीब 72 से ज्यादा साइटों पर होर्डिंग लगा दिए। 40 लाख के करीब काम मिला, मगर जो 21 लाख रुपए जमा करने थे वे भी जमा नहीं हुए। इसमें भी एक-दो महीने नहीं, बल्कि इसे भी आठ महीने हो गए। नोटिस के अलावा निगम ने न तो किसी फर्म का टेंडर निरस्त किया, न ही दूसरा कोई एक्शन। निगम की ढिलाई का फायदा लिया जा रहा है। निजी मकानों पर सिर्फ किरायेनामे से प्रचार निजी मकानों पर भी प्रचार-प्रसार की छूट दी गई है। यह काम एक ही फर्म को मिला है। यहां भी कागज़ों में सहमति एक दर्जन के आसपास की है, मगर साइटें कई दर्जन काम कर रही हैं। इसमें कोई भी व्यक्ति निजी मकान पर होर्डिंग लगा सकता है। छत और जमीन पर लगा सकते हैं। सेफ्टी सर्टिफिकेट लगाना होता है, मगर एक मामले में यूं हुआ कि सेफ्टी सर्टिफिकेट फरवरी में ही बन गया और अनुमति मार्च में मिली। यहां भी एक के बराबर दूसरे लगाने की परमिशन है, जबकि कई जगह एक के ऊपर एक लगी है। शर्त में है कि जिस भवन पर होर्डिंग लगनी है, वहां जमीन के मूल कागज़ात लगाने हैं, जबकि निगम में जमा किरायानामा लग रहा है। इसकी वजह है कि कागज़ात न तो डीएलआर देख रहा, न अकाउंट विभाग इसका कैलकुलेशन कर रहा है। जहां सौंदर्यीकरण की जगह नहीं, वहां भी बदले में विज्ञापन शहर के जितने भी फ्लाईओवर हैं, वहां ब्यूटीफिकेशन के बदले विज्ञापन की छूट एक फर्म को दी गई है। रानीबाजार ओवरब्रिज, एमएस कॉलेज वाली पुलिया, चौखूंटी फाटक, पूगल रोड और इंडस्ट्रियल रोड पर सौंदर्यीकरण के बदले विज्ञापन का अधिकार दिया गया। हैरानी इस बात की है कि एमएस कॉलेज पुलिया पर डिवाइडर पर नाला चल रहा है। यहां प्लांटेशन की कोई जगह नहीं। चौखूंटी आरओबी पर डिवाइडर ही नहीं है, न पौधे रखने की जगह। पूगल रोड नगरीय सीमा से बाहर है। निगम का एरिया ही नहीं है। इंडस्ट्रियल रोड 7 नंबर ज़ोन में है और यहां पहले से एक फर्म को प्रचार-प्रसार का काम मिला हुआ है। फिर भी यहां दूसरी फर्म घुसपैठ कर रही है, क्योंकि उसके पास पावर दी हुई है। चौराहों से लेकर पुल तक अटे :3 सालों से बिना परमिशन के साइटें चल रही हैं। एमएस पुलिया पर 4 होर्डिंग लगी हैं, जबकि दो की परमिशन है। चौखूंटी पर एक की परमिशन, दो लगी। गोगागेट पर 3 की जगह 6 लगी। बांद्रा बास मोड़ पर बालकनी पर सटी है। राम रतन कोचर पर एक की परमिशन, दो लगी। निगम आयुक्त के पास इसकी शिकायत भी हो चुकी है। शुक्रवार को नए प्रशासक और संभागीय आयुक्त के पास भी पूरी तथ्यात्मक रिपोर्ट गई है। “स्टाफ की कमी है। हालांकि अब 3 आरओ आए हैं। अब काम बांटेंगे। मैं नियमों को चेक कराता हूं। हालांकि मैंने निर्देश दिए हैं—अवैध होर्डिंग तत्काल हटाएं और पैसा जमा नहीं करता तो जब्त करें। मैं सोमवार को चेक कराता हूं।” -मयंक मनीष,कमिश्नर, नगर निगम

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