सवेरे की धुंध अभी छंटी भी नहीं थी कि हमीदिया अस्पताल के बाहर शुक्रवार सुबह दर्द, आक्रोश और बेचैनी एक साथ फूट पड़ी। गौहरगंज की 6 साल की मासूम से दुष्कर्म के आरोपी सलमान को जैसे ही इलाज के लिए सुबह करीब 5:30 बजे इमरजेंसी में लाया गया, वहां मौजूद हर शख्स की आंखों में गुस्सा और दर्द तैर गया। मरीजों से लेकर परिजनों और सामाजिक संगठनों तक हर आवाज में एक ही मांग गूंज रही थी- ‘उसे फांसी दो…, अभी फांसी दो!’ यदि फांसी नहीं दे सकते तो हमारे हवाले कर दो। हम बीच चौराहे फांसी देंगे। यह भीड़ सिर्फ विरोध की नहीं थी, बल्कि असुरक्षा और उस टीस का प्रतीक थी, जो किसी मासूम पर हैवानियत की खबर सुनते ही पूरे समाज में गूंज उठती है। हर तरफ से एक ही सवाल- ‘कब तक मासूमों पर ऐसे दरिंदों का कहर?’ और एक ही मांग- ‘एनकाउंटर करो…। 12 से कम उम्र की बच्चियों से दुष्कर्म पर फांसी का प्रावधान 2018 में मप्र सरकार ने 12 वर्ष से कम उम्र की बच्चियों से दुष्कर्म के मामलों में फांसी का प्रावधान किया था। तब यह संशोधन आईपीसी की धारा 376AB और पॉक्सो एक्ट की धारा 6 के तहत किया गया था। बीएनएस लागू होने के बाद इसकी धारा 65(2) और पॉक्सो की धारा 5/6 में भी सजा का यही प्रावधान है। -राजेंद्र उपाध्याय, डीपीओ भोपाल आगे क्या : फास्ट्रैक कोर्ट जाएगा मामला : गिरफ्तारी के बाद पुलिस मेडिकल, एफएसएल, डीएनए टेस्ट, गवाहों और बच्ची के बयान जैसे सबूत जुटाएगी। 90 दिन में चार्जशीट पेश होगी। केस फास्टट्रैक पॉक्सो कोर्ट में चलेगा। जिरह के बाद अदालत सबूतों के आधार पर सजा सुनाएगी। अस्पताल में हैवान, सुरक्षा के लिए 45 जवानों का पहरा…
सलमान को कोर्ट में पेश करना था, लेकिन उसे गोली लगी थी। अस्पताल में होने की वजह से जज भी वहीं आए। उन्होंने जेल वारंट जारी किया, लेकिन हालत में सुधार होने तक वह अस्पताल में रहेगा। भीड़ के आक्रोश को देखते हुए हमीदिया के बाहर 45 जवानों का पहरा लगाया गया है। मासूम की हालत में सुधार
हैवानियत की शिकार मासूम एम्स में भर्ती है। उसकी हालत पहले से बेहतर बताई जा रही है। जल्द डिस्चार्ज होने की संभावना है। 3 महीने बाद पहली, 6 महीने बाद दूसरी सर्जरी होगी। लोग उसकी सलामती की दुआ कर रहे हैं।


