दिवाली के बाद बच्चे के कान में बहुत तेज दर्द होने लगा। आंखों में जलन थी और उसे सांस लेने में भी दिक्कत हो रही थी। इसके बाद हम के डॉक्टर के पास पहुंचे तो जांच में पता चला कि एडेनोइड्स चौथे स्टेज पर पहुंच चुका है। डॉक्टर ने ऑपरेशन करने की सलाह दे दी। कहा कि हम आपको कुछ बचाव के तरीके बता सकते हैं, लेकिन आप उन्हें कर नहीं पाएंगे। जब हमने पूछा-क्या? तो वो बोले-दिल्ली-एनसीआर छोड़ दीजिए। यह कहना है उस 5 साल के बच्चे की मां साक्षी पाहवा का, जिसकी प्रदूषण के कारण इतनी तबीयत बिगड़ गई कि डॉक्टरों को उसकी सर्जरी करनी पड़ी। साक्षी पाहवा ने कहा- ढ़ाई साल पहले हम नोएडा शिफ्ट हुए थे। तभी से मेरे बच्चे को लगातार खांसी-जुकाम और बुखार होने लगा। इसके बाद हमने उसे कान के डॉक्टर को दिखाया तो पता चला कि बच्चे को एडेनोइड्स है। बच्चा छोटा होने की वजह से डॉक्टर ने ऑपरेशन करने के बजाय दवा चलाने की सलाह दी। तभी से उसका इलाज दवाओं से ही चल रहा था। इस पूरे मामले पर दैनिक भास्कर ने बेटे की माता-पिता से बातचीत की।
साक्षी पाहवा ने कहा-साढ़े 5 साल का ज्यारित अब पहले से ठीक है, लेकिन डॉक्टर ने अभी उसे खुली हवा में बाहर जाने से मना किया है। वह अगले 15 दिन तक घर से बाहर नहीं निकलेगा। उसके बाद ही वह दोस्तों के साथ खेल पाएगा। इसकी वजह दिल्ली-एनसीआर का बढ़ता प्रदूषण है। अब जानिए पूरा मामला… दो साल पहले हुई थी एलर्जी
साक्षी ने बताया- करीब ढाई साल पहले मेरे पति सचिन पाहवा की नौकरी के कारण हमारा परिवार सिरसा से नोएडा शिफ्ट हुआ था। दिवाली 2023 के बाद से ज्यारित को हल्की सर्दी-ज़ुकाम की समस्या होने लगी। दवाइयों से थोड़ी राहत मिलती, लेकिन फिर वही हालत हो जाती। बेटे को लगातार सर्दी, खांसी और बुखार की दिक्कत होने से परेशान हो गए। फिर हम लोग ज्यारित को ईएनटी विशेषज्ञ को दिखाया, तो पता चला कि उसे एडेनोइड्स की परेशानी है। बच्चा छोटा था, इसलिए डॉक्टर ने ऑपरेशन के बजाय दवाओं से इलाज जारी रखने की सलाह दी। इसके बाद उसकी नियमित दवाइयां चलने लगीं। ट्रिप से लौटते ही फिर बढ़ी दिक्कत
इस बीच परिवार का एक ट्रिप प्लान बन गया और हम अंडमान गए। वहां एक हफ्ते के दौरान ज्यारित पूरी तरह ठीक रहा। न उसे सांस लेने में तकलीफ़ हुई, न कफ की समस्या। वहां का AQI 30 से 50 के बीच था। लेकिन जैसे ही हम लौटे तो 2-3 दिनों में फिर वही समस्या शुरू हो गई। केजी में पढ़ता है ज्यारित
ज्यारित केजी में पढ़ता है। टीचर ने बताया कि वो सभी एक्टिविटी में ठीक है, बस माइंड मेकअप नहीं कर पाता है। दिवाली 2025 के तुरंत बाद उसकी तबीयत अचानक ज्यादा खराब हो गई। कान में तेज दर्द होने लगा, सांस लेने में परेशानी बढ़ गई और कफ खत्म ही नहीं हो रहा था। हम काफी चिंतित हो गए। इसके बाद हमने ज्यारित को नोएडा के कई अस्पतालों में दिखाया, लेकिन हालत में सुधार नहीं हुआ। फिर हम गुरुग्राम के एक डॉक्टर के पास गए। जांच में पता चला कि बढ़ते प्रदूषण की वजह से ज्यारित के एडेनोइड्स और टॉन्सिल काफी बढ़ गए हैं। स्टेज-4 पर पहुंच गया है। अब इसके लिए सर्जरी जरूरी थी। डॉक्टर ने उसकी सर्जरी की और 15 दिन तक आराम करने की सलाह दी है। अब ज्यारित स्कूल नहीं जा रहा और घर पर ही रहता है। उसके दोस्त घर आकर खेलते हैं। उसे 2 एयर प्यूरीफायर के बीच रहना पड़ रहा है, जिससे समस्या दोबारा न बढ़े। अभी उसका इलाज जारी है।
नोएडा से वापस जाएंगे सिरसा
वहीं, पिता सचिन पाहवा ने कहा- सिरसा में AQI हमेशा नोएडा की तुलना में आधा या उससे भी कम रहता है। ऐसे में हमें मजबूरी में वापस वहीं जाना पड़ सकता है। नौकरी यहां है, लेकिन जब शरीर और बच्चा ही स्वस्थ नहीं रहेंगे तो यहां रहकर क्या फायदा। इसलिए हम वहां जाने की योजना बना रहे हैं, बस पहले ज्यारित पूरी तरह ठीक हो जाए। दिल्ली देश की राजधानी है और हम एनसीआर में रहते हैं। ऐसे में कम से कम इतना इंतजाम होना चाहिए कि प्रदूषण कम हो सके और बच्चे खुली हवा में सांस ले सकें। आज हमारे बच्चे को परेशानी हुई है, कल किसी और बच्चे को न हो, इसके लिए ठोस कदम उठाने जरूरी हैं। नहीं तो यहां रहना और मुश्किल होता जाएगा। कई देशों ने अपने यहां प्रदूषण पर नियंत्रण पा लिया है, तो यहां भी यह संभव है। बस जरूरत है कि इस समस्या को गंभीरता से लिया जाए। अब देखिए बच्चे की 2 तस्वीरें सोशल मीडिया पर जारी किया था वीडियो
26 नवंबर को baby.khrisha_jayrit नाम के इंस्टाग्राम अकाउंट से एक के बाद एक 2 वीडियो शेयर किए गए। पहली वीडियो में बच्चे की स्थिति दिखाई गई। इस दौरान वीडियो में बताया गया कि दिल्ली-एनसीआर का बढ़ता प्रदूषण सिर्फ हवा को जहरीला नहीं बना रहा, बल्कि उनके पांच साल के बेटे को सर्जरी कराने तक की हालत में पहुंचा दिया है। वीडियो में बच्चे की मां ने कहा-वे 2 साल पहले NCR में रहने आए थे, तभी से बेटे को लगातार सर्दी, खांसी, सांस लेने में परेशानी और गंभीर एलर्जी होने लगी। इलाज चलता रहा, लेकिन किसी दवा का असर नहीं हुआ। हवा इतनी खराब है कि बच्चा ठीक ही नहीं हो पा रहा। प्रदूषण हर दिन बढ़ रहा है। माता-पिता होने के नाते अपने बच्चे को अस्पताल में रोते देखना सबसे मुश्किल है। हम टूट चुके हैं। हम टैक्स देते हैं, लेकिन बदले में हमारे बच्चों को क्या मिल रहा है? अब इस प्रदूषण पर खुलकर बात करनी ही होगी। गुरुग्राम के एक अस्पताल में बेटे की करानी पड़ी सर्जरी
पिता सचिन पहवा ने भी वीडियो में कहा-प्रदूषण ने उनके बेटे के एडेनोइड्स और टॉन्सिल पर असर डाला, जिसकी वजह से गुरुग्राम के एक अस्पताल में उसकी सर्जरी करानी पड़ी। मेरा 5 साल का बेटा आज अस्पताल में है, सिर्फ इसलिए क्योंकि NCR की हवा अब बच्चों के लिए भी सुरक्षित नहीं बची। दूसरी वीडियो में बताया गया-प्रदूषण बच्चे के बचपन को भी प्रभावित कर रहा है। लगातार खांसी-कफ और एलर्जी के कारण वह बाहर खेल तक नहीं सकता। हम अपने बच्चे को सुरक्षित महसूस भी नहीं करवा पा रहे। हम माता-पिता असहाय हैं और बच्चे तकलीफ झेल रहे हैं। सरकार कब जागेगी? हमारे बच्चों का हक साफ हवा है, न कि अस्पताल का बिस्तर। दिवाली के बाद NCR में बढ़ता है प्रदूषण
दीपावली से पहले नोएडा का AQI आमतौर पर 150 से 200 के बीच रहता है। लेकिन दिवाली के बाद नवंबर में प्रदूषण तेजी से बढ़ जाता है। ठंड बढ़ने के कारण हवा में मौजूद धूल और प्रदूषक कण ऊपर उठकर जम जाते हैं, जिससे स्मॉग बनता है। यही स्मॉग लोगों की सेहत पर सीधा असर डालता है। इस समय नोएडा में AQI लगातार 300 से 400 के बीच रिकॉर्ड हो रहा है, जो ‘बहुत खराब’ श्रेणी में आता है। प्रदूषण नियंत्रण के लिए हर साल ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) लागू किया जाता है, लेकिन इसके बावजूद हालात काबू में नहीं आ पा रहे हैं। क्यों बढ़ रहा है दिल्ली-एनसीआर और नोएडा का प्रदूषण? नोएडा में 22 से 27 नवंबर तक 4 दिनों का AQI ————————- ये भी पढ़ें- ‘पत्नी सिर्फ आनंद का साधन’:जगद्गुरु रामभद्राचार्य WIFE का फुल फॉर्म बताकर ट्रोल हुए जगद्गुरु रामभद्राचार्य सोशल मीडिया पर फिर ट्रोल हो रहे हैं। उनका एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने वाइफ (WIFE) शब्द का फुल फॉर्म समझाया। उन्होंने कहा- वाइफ मतलब… पढ़िए पूरी खबर…


