‘क्लीनिक ले गए थे, तब बेटा स्वस्थ था। वह सिर्फ रो रहा था। उसे पहली बार डॉक्टर के पास ले गया था। क्लीनिक पर उसे दवा पिलाई। घर लाए, तो फिर तबीयत बिगड़ी। दोबारा ले गए, तो मना कर दिया। सरकारी अस्पताल में मृत बता दिया।’ यह कहना है छह महीने के इकलौते बेटे हर्षित को खोने वाले अनिल अहिरवार का। विदिशा जिले के सिरोंज में गुरुवार शाम इलाज के बाद बेटे की मौत हो गई। रात में ही स्वास्थ्य विभाग की टीम पहुंची और क्लीनिक सील कर दिया। जांच में पता चला कि क्लीनिक बिना रजिस्ट्रेशन के चल रहा था। यहां बड़ी मात्रा में एक्सपायर्ड एलोपैथिक दवाएं भी मिली हैं। क्लीनिक के संचालक अजीज उद्दीन के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की गई है। मामला सामने आने के बाद दैनिक भास्कर की टीम मुख्यालय से 12 किलोमीटर दूर लिधौड़ा गांव पहुंची। क्लीनिक जाकर देखा। आरोपी डॉक्टर से भी बात की। पहले बात बच्चे की… पिता बोले- हंसी देखकर मिट जाती थी थकान
सिरोंज तहसील मुख्यालय से हिमलानी रोड से 10 किमी आगे लिधौड़ा गांव के लिए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की सड़क बनी है। करीब दो किमी आगे चलने पर गांव पहुंचे। यहां दो-तीन ग्रामीणों से पूछते-पूछते बच्चे के घर पहुंच गए। गांव के आखिरी छोर पर अनिल अहिरवार का कच्चा दो कमरों का घर बना है। कबेलू की छत है। यहां वह परिवार के साथ रहते हैं। पेशे से खेतिहर मजदूर हैं। दैनिक भास्कर की टीम पहुंची, तो अनिल बाहर ही मिल गए। वह छह महीने के इकलौते बेटे हर्षित के शव को दफनाकर ही आए थे। गांव वाले जा चुके थे। घर के बाहर 10-12 रिश्तेदार मौजूद थे। घर के अंदर से महिलाओं के रोने की आवाज आ रही थी। अनिल ने बताया कि साढ़े तीन साल पहले स्वाति के साथ शादी हुई थी। एक डेढ़ साल की बेटी सायरा है। छह महीने पहले हर्षित का जन्म हुआ। आसपास गांव में काम करने जाते हैं। इसी से गृहस्थी चलती है। कुछ ही दिन पहले बेटा पहचानना सीखा था। आवाज देते थे, तो पलटकर देखता था और हंसने लगता था। उसके चेहरे पर हंसी देखकर दिनभर की थकान मिट जाती थी। बोले- बेटा स्वस्थ था, वह सिर्फ रो रहा था
अनिल ने बताया कि बेटा एक दिन पहले तक स्वस्थ था। इससे पहले, कभी उसे अस्पताल नहीं ले गए। 26 नवंबर की रात वह लगातार रोए जा रहा था। बमुश्किल चुप हुआ। सुबह फिर से रोना शुरू कर दिया। समझ नहीं आ रहा था। लगा कि शायद उसे कोई तकलीफ है। दोपहर करीब 2 बजे उसे बाइक से सिरोंज में दिल्ली क्लीनिक पर डॉ. अजीज उद्दीन के पास लेकर गए। यहां बेटी को कई बार दिखाने लाए थे, लेकिन बेटे को पहली बार लेकर गए थे। यहां डॉ. अजीज उद्दीन ने देखा। उसे दो सिरप की पांच-पांच एमएल खुराक पिलाई। हालांकि बीमारी के बारे में कुछ नहीं बताया। बच्चे का पेट फूला हुआ था। दो दवाएं गो स्लीप, लसपास और रोगन कोगू पर्चे पर भी लिखकर दीं। रोगन कोगू से इससे मालिश करने के लिए कहा था। चौक से एक मेडिकल से दवा खरीद ली। इसके बाद हम घर आ गए। बेटे को दो दवा की खुराक भी दे दी। आधे घंटे बाद बेटे की ज्यादा तबीयत खराब होने लगी। वहे बेदम सा हो गया। दोपहर करीब 3.30 बजे दोबारा उसे लेकर क्लीनिक पहुंचे। यहां अजीज उद्दीन का बेटा डॉ. फारुखी (BUMS) मिले। उन्होंने कहा कि बच्चे में ऑक्सीजन की कमी है। उन्होंने आरोग्य नाम के अस्पताल भेज दिया। कहा कि तुम चलो, मैं भी वहीं आ रहा हूं। आरोग्य अस्पताल पहुंचे, तो वहां बच्चे की हालत देखकर बाहर से ही भगा दिया। कह दिया कि सरकारी अस्पताल ले जाओ। वहां देखा, तो फारुखी कहीं नहीं दिखा। इतने में बच्चे में हरकत भी नहीं थी। शरीर ठंडा पड़ चुका था। हम घबरा गए। शाम करीब 5:30 बजे सिविल अस्पताल ले गए। यहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। बीएमओ डॉ. नीरज पंथी को पूरी बात बताई। उन्होंने मामले को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई की। डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई की जाना चाहिए। अब क्लीनिक के बारे में बात… सिंगल फ्लोर पर पूरा अस्पताल
इसके बाद टीम सिरोंज मुख्यालय पर कोर्ट गेट के पास राज बाजार में दिल्ली क्लीनिक पहुंची। बाहर दिल्ली क्लीनिक का बोर्ड लगा है। मदरसे की बिल्डिंग में ग्राउंड फ्लोर पर क्लीनिक के लिए एरिया किराए से लिया है। बाहर डॉ. अजीज उद्दीन, बीआईएमएस और पास ही डॉ. एमडी फारुखी बीयूएमएस लिखा है। करीब 700 वर्गफीट में दो हॉल, तीन केबिन छोटे हैं। एक कमरे में मेडिकल स्टोर की तरह रैक लगाकर दवाएं भरी हैं। इनमें एलोपैथिक, आयुर्वेदिक और यूनानी दवाएं शामिल हैं। हॉल और केबिन में मरीजों के लेटने के लिए बेंच भी बिछी हैं। मेडिकल भी खुद ही चलाते हैं। सफाई करने के लिए स्टाफ और अटेंडेंट भी रखा है, लेकिन वह भी मौजूद नहीं था। स्टेथोस्कोप भी रखे हैं। रोजाना करीब 50 से ज्यादा मरीज आते हैं। यहां तक कि लाइन लगाना पड़ती है। यहां आमतौर पर सर्दी-खांसी, जुकाम, बुखार और स्किन डिसीज का इलाज कराने मरीज आते हैं। दोनों पिता-पुत्र समाज के गणमान्य नागरिकों में शामिल हैं। उनकी छवि असरदार शख्सियत की है। अजीज उद्दीन मदरसे के संचालक मंडल में भी है। डॉक्टर बोला- 48 साल से कर रहा प्रैक्टिस
डॉ. अजीज उद्दीन से दैनिक भास्कर ने बात की। हालांकि उन्होंने कैमरे पर बात करने से इनकार कर दिया। मौखिक तौर पर बताया कि 1976 में दिल्ली की हमदर्द यूनिवर्सिटी से BIMS यूनानी डिग्री ली है। साल 1977 से सिरोंज में क्लिनिकल प्रैक्टिस कर रहे हैं l हर्षित के बारे में बताया कि बच्चे का पेट फूला हुआ था, तो उसे लिव 52 सिरप और डायसाईं क्लोमिन ड्रॉप पिलाई थी। मेडिकल स्टोर से खरीदने के लिए मालिश की दवा लिखकर दी थी। वो कहीं से खरीदी होगी l दोबारा मेरे बेटे एमडी फारुखी ने उसे एग्जामिनेशन किया था। उसका ऑक्सीजन लेवल कम था, तो उसे कहीं और ले जाने बोल दिया था। मतलब, दवाइयां देने के करीब दो घंटे बाद ही बच्चे की मौत हो गईं l मरीजों से फीस नहीं लेता, लेकिन दवाओं में बचने वाला कमीशन ही प्रॉफिट है। एलोपैथिक दवाओं के बारे में पूछने पर स्पष्ट जवाब नहीं दिया। बीएमओ बोले- एक्सपायर्ड दवाओं को जब्त कर क्लीनिक सील
बीएमओ डॉ. नीरज पंथी ने बताया कि रात करीब 8 बजे राजस्व और पुलिस टीम ने क्लीनिक पर जाकर जांच की थी। यहां बड़ी मात्रा में एक्सपायर्ड दवाएं और ड्रिप मिलीं। उनके पास मेडिकल स्टोर का लाइसेंस नहीं है l क्लीनिक का रजिस्ट्रेशन भी नहीं मिला है, इसलिए उसे सील किया गया है l सिरोंज थाने में अजीज उद्दीन के खिलाफ BNS की धारा 271(24) मध्य प्रदेश आर्युविज्ञान परिषद एक्ट (19561958) के तहत FIR दर्ज कर ली गई। पुलिस का कहना है कि परिजन के बयानों और पीएम रिपोर्ट आने के बाद ही आगे कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने पूछताछ के लिए डॉक्टर को बुलाया था, लेकिन उसके बाद छोड़ दिया। यह भी पढ़ें- बच्चे की मौत…पुलिस ने डॉक्टर को छोड़ा विदिशा के सिरोंज में एक यूनानी डॉक्टर ने 6 महीने के बच्चे को सिरप पिलाई, इसके कुछ घंटे बाद उसकी मौत हो गई। पुलिस प्रशासन ने क्लीनिक सील कर दिया है। पूछताछ के बाद डॉक्टर को छोड़ दिया गया।विदिशा के सिरोंज में एक यूनानी डॉक्टर ने 6 महीने के बच्चे को सिरप पिलाई, इसके कुछ घंटे बाद उसकी मौत हो गई। पुलिस प्रशासन ने क्लीनिक सील कर दिया है। पूछताछ के बाद डॉक्टर को छोड़ दिया गया। पढ़ें पूरी खबर


