जलवायु अनुकूल कृषि पद्धतियों पर पन्ना में हुई कार्यशाला:कृषि विशेषज्ञ बोले- FAQ मानक अपनाएं, MSP पर बेचें, आय में होगा सीधा लाभ

पन्ना के कृषि विज्ञान केंद्र में रिलायंस फाउंडेशन के सहयोग से समर्थन संस्था ने एक कार्यशाला का आयोजन किया। इसका विषय किसान उत्पादों की गुणवत्ता, बाजार से जुड़ाव, मूल्य संवर्धन और जलवायु अनुकूलित कृषि पद्धतियों को अपनाना था। इस एक दिवसीय कार्यशाला में कृषि उपार्जन केंद्रों में की गई पहलों पर भी चर्चा की गई। कार्यशाला में पन्ना और अजयगढ़ ब्लॉकों के विभिन्न गांवों से प्रमुख किसान, विभागीय अधिकारी और विशेषज्ञ उपस्थित रहे। यह कार्यक्रम विभिन्न विभागों और संगठनों के सहयोग से आयोजित किया गया था। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य किसानों को उनके उत्पादों जैसे धान, उड़द, मूंग, सोयाबीन, अरहर, मक्का, गेहूं, चना और सरसों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर बेचने के लिए प्रेरित करना था। इससे उन्हें उचित मूल्य प्राप्त हो सके और उनकी आय में वृद्धि हो। विशेषज्ञों ने किसानों को बताया कि निरंतर लाभ के लिए कृषि उत्पादों में FAQ (Fair Average Quality) मानक बनाए रखना महत्वपूर्ण है। किसानों को प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित करने के लिए भी प्रोत्साहित किया गया। इसका उद्देश्य उत्पादक और उपभोक्ता के बीच एक एकीकृत मूल्य श्रृंखला (Integrated Value Chain) विकसित करना है, जिससे किसानों को अधिक मुनाफा मिल सके। जैविक कृषि को बढ़ावा देने और जैविक उत्पादों के लिए अलग बाजार व मूल्य निर्धारण पर भी चर्चा हुई। कृषि विभाग के उपसंचालक डॉ. ओ.पी. तिवारी ने किसानों को पशुपालन पर ध्यान देने की सलाह दी, जिससे खेती में सुधार हो सके। उन्होंने जिले में स्वयंसेवी संस्थाओं और विभागों से मिलकर जैविक हाट लगाने का आह्वान किया, ताकि लोगों को शुद्ध हरी सब्जियां मिल सकें। आत्मा परियोजना के उपसंचालक एपी सुमन ने किसानों से संवाद करते हुए बताया कि हजारों की संख्या में जैविक किसान और किसान सखी तैयार करने की योजना है। कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) के प्रमुख डॉ. पी.एन. त्रिपाठी ने किसानों को कम लागत के लिए मशीनों का उपयोग करने और जैविक उत्पादों से खेती करने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि सभी आवश्यक तकनीकें और प्रशिक्षण सुविधाएं उपलब्ध हैं। रिलायंस फाउंडेशन के जिला प्रबंधक मुकेश सिंह सेंगर ने जलवायु अनुकूल ग्राम विकास योजना, जलवायु मित्रों के कैडर निर्माण और मशीनीकरण पर चर्चा की। जिला परियोजना प्रबंधक (NRLM) प्रमोद शुक्ला ने बताया कि किसान सखी और पशु सखी जैविक उत्पादों और दवा निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। किसान उपार्जन केन्द्रों में साफ सुथरा अनाज ले जाये ताकि समस्या से बच सके। कार्यक्रम में गुखौर, बड़ावड़ा, रानीपुरा, सवाईगंज, दिया, उमरी, जारधोबा, रतगवा, अहिरगुवा, बिल्हा, जानवर, जमुनहाई, बाबूपुर उड़की, पालथरा, देवगांव, बरकोला ग्रामो के लीड किसान शामिल हुए। कार्यक्रम समन्वयक स्वापनिल बघेल ने सभी किसान एवं अधिकारियो का अभार व्यक्त किया गया । ज्ञानेनद्र तिवारी ने कार्यक्रम का उद्देश्य एवं सफल संचालन किया गया।

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