विदिशा नगर पालिका में विकास कार्यों की उपेक्षा और लापरवाही के आरोपों को लेकर पार्षदों का धरना 18वें दिन भी जारी रहा। कड़ाके की ठंड के बावजूद पार्षद अपने आंदोलन से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। पार्षदों ने बताया कि उन्होंने कई ज्ञापन सौंपे हैं, लेकिन नगर पालिका प्रशासन का कोई अधिकारी या कोई जनप्रतिनिधि मौके पर नहीं पहुंचा। स्थिति को समझने का कोई प्रयास नहीं किया गया। पार्षदों ने कहा कि जब उनकी बात कोई सुनने को तैयार नहीं है, तो अब वे सीधे जनता के बीच जाएंगे। पार्षदों ने ‘समर्थन पत्र’ तैयार किया इसके तहत, पार्षदों ने शहर की 10 प्रमुख समस्याओं पर केंद्रित एक ‘समर्थन पत्र’ तैयार किया है। अब वे घर-घर जाकर हस्ताक्षर अभियान चलाएंगे और शहरवासियों के साथ-साथ वरिष्ठ नेताओं से भी सीधा समर्थन मांगेंगे। उनका कहना है कि यह लड़ाई व्यक्तिगत नहीं, बल्कि शहर के भविष्य से जुड़ी है। पार्षद ने कहा- शहर के विकास के लिए लड़ते रहेंगे धरने पर बैठे पार्षद धर्मेंद्र सक्सेना ने कहा, “हम 18 दिनों से बैठे हैं, लेकिन कोई अधिकारी या जनप्रतिनिधि हमारी सुध लेने नहीं आया। इसलिए अब हम शहर की समस्याओं को लेकर जनता के पास जा रहे हैं।” उन्होंने आगे बताया कि पहले 19 पार्षद इस आंदोलन में शामिल थे, लेकिन दबाव के कारण कई पीछे हट गए। अब बचे हुए 6 पार्षद डरेंगे नहीं और जब तक जान है, शहर के विकास के लिए लड़ते रहेंगे। पार्षद जमना कुशवाहा ने इस बात पर जोर दिया कि वे सिर्फ विकास की लड़ाई लड़ रहे हैं। उन्होंने कहा, “जो भी शहर के हित में हमारे साथ आना चाहता है, उसका स्वागत है।” विधायक हमारी 10 मांगें नहीं सुन रहे पार्षद अशोक जाट ने बताया कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान विदिशा आए थे, लेकिन वे भी दूसरे रास्ते से निकल गए। मुख्यमंत्री 105 मांगें मान लेते हैं, लेकिन विधायक उनकी 10 मांगों को भी नहीं सुन रहे हैं। पार्षदों ने स्पष्ट किया है कि उनका आंदोलन अब जनआंदोलन का रूप लेगा और पूरे शहर से समर्थन जुटाया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि यह संघर्ष अभी समाप्त होने वाला नहीं है।


