जालोर में हर महीने के अंतिम रविवार व्यापारी रखेंगे छुट्टी:श्रमिकों की शिकायत के बाद अधिकारियों ने दिए निर्देश, फिर मीटिंग में हुआ फैसला

जालोर में व्यापार मंडल ने हर महीने के अंतिम रविवार को अवकाश घोषित किया हैं। यह फैसला 13 नवंबर को कुछ श्रमिकों की शिकायत के बाद श्रमिक विभाग के निर्देशों पर व्यापार मंडल की ओर से लिया गया। इसके तहत इस बार भी नवंबर के अंतिम रविवार को 30 नवंबर अवकाश घोषित किया गया हैं। व्यापार मंडल एसोसिएशन के अध्यक्ष ने कहा- अंतिम रविवार को पहले अवकाश का नियम, लेकिन शादियों की सीजन को लेकर कुछ व्यापारी दुकान खुली रखते हैं। उन्हें भी अवकाश के बारे में जानकारी दे दी गई है। दरअसल, जिले में 13 नवंबर को जालोर के कुछ श्रमिकों ने कलेक्टर को ज्ञापन दिया था। इसमें बताया कि महीने के अंतिम रविवार को अवकाश दिया जाता था, लेकिन अब कई व्यापारी इसकी अनुमति नहीं दे रहे हैं। वहीं, श्रमिकों को प्रतिदिन 12 से 15 घंटे तक कार्य करना पड़ रहा है। जबकि राज्य सरकार के श्रम कानूनों के अनुसार अधिकतम कार्य समय 9 से 10 घंटे प्रतिदिन तय है। श्रमिकों के संगठन ने कहा कि हम भी सामाजिक प्राणी हैं, हमारे परिवार और बच्चे हैं। ऐसे में महीने में एक दिन की भी छुट्टी न मिलना अमानवीय है। उन्होंने बताया- मीनाखेड़ा, सांचौर, जोधपुर, सुमेरपुर और शिवगंज जैसे शहरों में व्यापार मंडलों द्वारा साप्ताहिक अवकाश नियमित रूप से रखा जाता है। जालोर में भी पूर्व में यह व्यवस्था रही है, लेकिन हाल के वर्षों में इसे बंद कर दिया गया है। कर्मचारियों ने कलेक्टर से मांग की है कि वे श्रम कानूनों का पालन सुनिश्चित करवाएं और व्यापारिक प्रतिष्ठानों के अध्यक्ष को निर्देश दें कि व्यापारियों की बैठक आयोजित कर इस समस्या का स्थायी समाधान किया जाए। इसके बाद 15 नवंबर को दी जनरल मर्चेट एसोसिएशन के पदाधिकारी व लेबर इंस्पेक्टर श्याम सुंदर ने वार्ता कर महीने के अंतिम दिन अवकाश की घोषणा की। एसोसिएशन की ओर से अवकाश की घोषणा
दी जनरल मर्चेट एसोसिएशन के अध्यक्ष जालम सिंह ने बताया- एसोसिएशन की ओर से कल महीने के अंतिम रविवार को अवकाश रहेगा और नियम पहले से हैं। लेकिन शादियों की सीजन के समय कुछ दुकानदार अपने दुकान खुली रखते हैं, या फिर रेगुलर ग्राहक आने पर खोलते हैं। बाकी महीने के हर अंतिम रविवार को अवकाश रहता हैं। ये खबर भी पढ़े- कर्मचारियों ने की साप्ताहिक अवकाश दिलाने की मांग:व्यापारियों पर लगाए श्रम कानूनों की अनदेखी के आरोप

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