भोपाल में किसान महासंघ की कृषिमंत्री से बैठक बेनतीजा:1 दिसंबर को खलघाट में 5 जिलों के किसान करेंगे आंदोलन

भारतीय राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ के प्रतिनिधियों और कृषिमंत्री एंदल सिंह कंसाना के बीच भोपाल में हुई बैठक बेनतीजा रही। किसान प्रतिनिधि फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) और कर्ज मुक्ति सहित अपनी अन्य मांगों पर अड़े रहे। इस असहमति के बाद, 1 दिसंबर को 5 जिलों के सैकड़ों किसान खलघाट के टोल नाके पर आंदोलन करेंगे। शनिवार दोपहर को हुई इस चर्चा के दौरान, कृषिमंत्री ने किसानों से आंदोलन न करने का आग्रह किया। उन्होंने आश्वासन दिया कि उनकी समस्याओं का समाधान किया जाएगा और वे मांगों को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तक पहुंचाएंगे। मंत्री ने CM के घर में शादी का हवाला देते हुए आंदोलन स्थगित करने का अनुरोध किया, लेकिन किसानों ने इसे अस्वीकार कर दिया और कहा कि आंदोलन तय है। आरोप- कंपनियों से मिलीभगत, किसानों का शोषण हो रहा
मध्य भारत प्रांत संगठन प्रभारी गोपाल पाटीदार (खरगोन), कैलाश पाटीदार और शंकर जाट ने आरोप लगाया कि कंपनियों की मिलीभगत से किसानों का शोषण हो रहा है। उन्होंने बताया कि मक्का, सोयाबीन और कपास जैसी फसलें न्यूनतम समर्थन मूल्य पर नहीं खरीदी जा रही हैं। किसानों ने स्पष्ट किया कि यदि ऋण मुक्ति और समर्थन मूल्य लागू होता है तो वे आंदोलन नहीं करेंगे। कृषिमंत्री ने केंद्र स्तर की नीतियों के संबंध में बात रखने का आश्वासन दिया, लेकिन कर्ज मुक्ति को लेकर सरकार के पास कोई नीतिगत पत्र न होने की बात कही। प्रतिनिधिमंडल ने कल (रविवार) मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से मिलने की भी बात कही है। गोमाता को राष्ट्र माता घोषित करने की भी मांग
किसानों ने फसल MSP, अन्य राज्यों की तरह भूमि अधिग्रहण पर उचित मुआवजा, सभी किसानों को ऋण मुक्त करने और MSP की गारंटी का कानून बनाने जैसी कई मांगें रखीं। इसके अतिरिक्त, गोमाता को राष्ट्र माता का दर्जा देने और दलहन, कपास व प्याज के आयात पर रोक लगाने की मांग भी शामिल है। चूंकि केंद्र स्तर की इन मांगों पर सहमति नहीं बन पाई, इसलिए आंदोलन का निर्णय लिया गया है।

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