मध्य प्रदेश में बिजली कंपनियों द्वारा किए गए मूल्य वृद्धि के प्रस्ताव के खिलाफ विभिन्न संगठन लामबंद हो गए हैं। इसी कड़ी में नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच, वरिष्ठ नागरिक एसोसिएशन सहित अन्य संगठनों ने बिजली विभाग की मनमानी के विरोध में 9 जनवरी से आंदोलन करने की चेतावनी दी है। बता दें कि नियामक आयोग ने मूल्य वृद्धि पर 24 जनवरी तक आपत्तियां बुलाई हैं। इन पर 11, 13 और 14 फरवरी को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई होना है। घाटा बताकर बढ़ा रहे रेट नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के सदस्य रजत भार्गव और डॉक्टर पांडे ने आरोप लगाया है कि मध्य प्रदेश की बिजली कंपनियां सत्ता पक्ष के हाथों की कठपुतली बनी हुई हैं। वर्ष 2023 में विधानसभा चुनाव के मद्देनजर बिजली कंपनियों का घाटा कम बताकर बिजली के रेट 1.65% बढाए गए। इसके बाद वर्ष 2024 में लोकसभा चुनाव के कारण बिजली की दरों में एक प्रतिशत से भी कम वृद्धि हुई। लेकिन वर्ष 2025 में बिजली कंपनियों ने पिछले दो सालों का हिसाब बराबर करते हुए 4107 करोड़ का घाटा दर्शाकर 7.52% तक विद्युत की दरें प्रस्तावित की हैं। विभिन्न संगठनों की हुई बैठक विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों की संयुक्त बैठक घंटाघर क्षेत्र में शनिवार को संपन्न हुई। बैठक में बिजली कंपनियों के प्रस्ताव के खिलाफ 9 जनवरी से आंदोलन करने का फैसला लिया गया है। संगठन के सदस्य धरना, प्रदर्शन और जन अभियान के माध्यम से विरोध जताएंगे। जरूरत पड़ी तो लेंगे कोर्ट की शरण नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के सदस्यों का कहना है कि यदि सरकार और बिजली कंपनियों द्वारा जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो इस मामले को लेकर हाई कोर्ट में जाएंगे।


