माया मोह में ग्रस्त मानव मानसिक रूप से व्यर्थ के विचारों में उलझने के कारण अशांत हो जाता है। मन की शांति भंग होने के कारण कभी-कभी व्यक्ति किसी कार्य को करने में गलत निर्णय ले लेता है, जिसके कारण हानि होती है। मानसिक कुंठा उत्पन्न होती है और व्यक्ति बीमारियों से ग्रस्त हो जाता है। बालक का मन शांत होता है इसलिए कि उसके मन में कोई सांसारिक विचार नहीं होता। एरोड्रम क्षेत्र में दिलीप नगर नैनोद स्थित शंकराचार्य मठ इंदौर के अधिष्ठाता ब्रह्मचारी डॉ. गिरीशानंदजी महाराज ने अपने नित्य प्रवचन में शनिवार को यह बात कही। डॉ. गिरीशानंद जी महाराज ने कहा मन को शांत करने के लिए व्यक्ति को 10- 15 मिनट सुबह-शाम ध्यान करना चाहिए। योगाभ्यास करना चाहिए। जिससे मन शांत हो। बालक में कोई विकार नहीं होता। इसलिए तुलसीदासजी ने राम रचित मानस के प्रथम कांड का नाम रखा बालकांड। कहने का मतलब है बालक जैसे शांत-चित्त रहोगे तभी अयोध्या कांड में प्रवेश करोगे। अयोध्याकांड में कोई युद्ध नहीं हुआ। जहां वैचारिक स्थिरता होती है, मन शांत होता है, वहां युद्ध नहीं होता। जो शांत मन हो वही साधु… महाराजश्री ने एक दृष्टांत सुनाया- एक भक्त था। उसने एक दिन एक साधु को भोजन के लिए आमंत्रित किया। दूसरे दिन साधु आ गए। भक्त ने कहा महाराज आप सीढ़ियों से ऊपर जाइए, तब तक मैं थोड़ा-सा काम करके आता हूं। जैसे ही साधु उसके घर पहुंचे, पत्नी ने साधु को झल्लाते हुए कहा- कहीं आगे जाओ। सुबह-सुबह निठल्ले लोग आ जाते हैं। तब तक भक्त आ चुका था। नीचे सीढ़ियों से उसने सब सुन लिया। साधु सीढ़ियों से नीचे उतर रहे थे। उसने कहा महाराज मेरी पत्नी को मालूम नहीं था कि मैं आपको बुलाकर लाया हूं। इसलिए आप चलिए। वह साधु को ऊपर ले गया। घर के अंदर कुछ सामान लेने गया। भक्त की पत्नी ने साधु से कहा तुम फिर आ गए। बहुत बेशरम हो। बगैर भोजन किए नहीं जाओगे। साधु ने कुछ नहीं कहा। भक्त आया। साधु को भोजन कराया। भक्त की पत्नी देख रही थी कि मैंने साधु का इतना अपमान किया, फिर भी ये कितने शांत हैं। न तो इन्हें क्रोध आया और न ही इनकी सौम्यता में कोई परिवर्तन आया। कितने प्रेम से इन्होंने भोजन किया। वह चरणों पर गिरकर रोने लगी। महाराज आप कितने अच्छे हैं। कितने शांत हैं। मेरे द्वारा अपमानित किए जाने के बाद भी आपको कोई मानसिक विकार उत्पन्न नहीं हुआ। साधु ने कहा कोई बात नहीं और सहज ही कह दिया कि कुत्ता तो मारने के बाद भी खाने आ जाता है और साधु चला गया।


