एमपी-महाराष्ट्र की सीमा पर स्थित पेंच अभयारण्य में बाघिन की तलाश में रिजर्व टीम को आखिरकार सफलता हाथ लगी है। ट्रैकिंग टीम ने शनिवार को उसे झाड़ियों के बीच देखा। अगर सबकुछ सही रहा तो रविवार या आने वाले दिनों में ट्रैंकुलाइजेशन के बाद यह बाघिन मध्य प्रदेश से करीब 800 किलोमीटर दूर रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व में शिफ्ट हो सकती है, जिसमें महज 7 घंटे लगेंगे। बता दें कि पिछले तीन दिनों से कोटा वन्यजीव विभाग की टीम वहां डटी हुई थी, लेकिन बाघिन का पता नहीं चल रहा था। टीमें हाथियों पर सवार होकर खोजबीन कर रही थीं। मुकंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर सुगनाराम जाट ने बताया कि यहां टाइगर रिजर्व में लगभग 120 बाघ-बाघिन हैं। ट्रैंकुलाइजेशन के लिए 8 हाथी दस्ते मौजूद हैं। शनिवार दोपहर को बाघिन दिखाई दी, जो करीब 2 से 3 साल की है। आने वाले दिनों में एनटीसीए के मानकों के अनुसार इसे ट्रैंकुलाइज कर बूंदी के रामगढ़ टाइगर रिजर्व में शिफ्ट करने के प्रयास किए जाएंगे। एयर लिफ्टिंग से शिफ्टिंग होगी और सभी जरूरी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। अगर सब ठीक रहा तो रामगढ़ पहुंचने में सिर्फ 7 घंटे लगेंगे। रिजर्व अधिकारियों ने बताया कि शनिवार सुबह अलग-अलग रेंज में बाघिन को रीलोकेट करने के लिए करीब 10 कैमरे लगाए गए थे। ट्रैप कैमरों में उसकी मौजूदगी की पुष्टि हो गई है। सर्चिंग टीम ने 8 हाथियों के साथ मिलकर इलाके में ट्रैकिंग की और दोपहर में बाघिन कुछ देर के लिए नजर आई। अब रिजर्व टीम ट्रैंकुलाइजेशन की तैयारी में जुट गई है।


