प्रोजेक्ट चीता के तहत कूनो नेशनल पार्क के खुले जंगल में छोड़े गए चीते अब अपनी टेरिटरी तलाशने के लिए लंबी दूरी तय करने लगे हैं। इसी दौरान बड़ी हलचल तब मची, जब मादा चीता आशा का शावक (केपी-2) मध्य प्रदेश की सीमा लांघकर राजस्थान के बारां जिले में पहुंच गया। यह शावक पिछले तीन-चार दिनों से बड़ौदा क्षेत्र में सक्रिय था। हाल ही में उसने पार्वती नदी, जो दोनों राज्यों के बीच प्राकृतिक कॉरिडोर का काम करती है, पार की और राजस्थान के रामगढ़ क्षेत्र के खेतों तक पहुंच गया। यहां उसने अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हुए एक वयस्क नीलगाय का शिकार भी किया। वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि कम उम्र में नीलगाय जैसे बड़े जानवर का शिकार करना इस बात का संकेत है कि शावक जंगल के माहौल में पूरी तरह ढल चुका है। शिकार के बाद शावक को खेत में आराम करते देखा गया। सूचना पर चीता मॉनिटरिंग टीम मौके पर पहुंची और राजस्थान वन विभाग के साथ ग्रामीणों को सतर्क करते हुए समझाया कि चीता मानव के लिए खतरा नहीं है, इसलिए न घबराएं और न ही उसे घेरने का प्रयास करें। ज्वाला और पवन के बाद अब आशा का शावक यह पहली बार नहीं जब कूनो के चीतों ने राजस्थान का रुख किया हो। इससे पहले मादा चीता ज्वाला चंबल पार करके सवाई माधोपुर तक पहुंच चुकी है, जो रणथंभौर टाइगर रिजर्व का नजदीकी क्षेत्र है। प्रोजेक्ट की शुरुआत में चीता पवन (अब नहीं रहा) भी एक बार राजस्थान में दाखिल हुआ था। वर्तमान में कूनो पार्क के करीब 16 चीते खुले जंगल में हैं। एक जहां राजस्थान पहुंचा, वहीं कुछ चंबल के बीहड़ों से होते मुरैना और ग्वालियर सीमाओं तक जा पहुंचे हैं। इस बीच राहत की खबर है कि दूर निकल चुका एक चीता लौटकर श्योपुर के ढेंगदा क्षेत्र के नजदीक देखा गया है।


