भारत सरकार ने 21 नवंबर 2025 को चार बहुप्रतीक्षित श्रम संहिताओं को लागू कर दिया है। भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) वर्ष 2002 से इन संहिताओं को लागू करने की लगातार मांग कर रहा था। सरकार का उद्देश्य इन कानूनों को सरल, पारदर्शी और प्रभावी बनाना है, जिससे देश का श्रम परितंत्र वैश्विक मानकों के अनुरूप हो सके। भारतीय मजदूर संघ की एक बैठक में, प्रदेश मंत्री सोमजी भूरिया ने इन श्रम सुधारों को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा घोषित ये चार श्रम संहिताएं वर्षों की मांग और संघर्ष का परिणाम हैं। अब देश का हर श्रमिक अधिक सुरक्षित, सशक्त और संगठित होगा। भूरिया ने स्पष्ट किया कि नई श्रम संहिताओं का मुख्य उद्देश्य बेहतर वेतन, सामाजिक सुरक्षा, सुरक्षित कार्यस्थल और श्रमिक कल्याण को व्यापक रूप से मजबूत करना है। सरकार का दावा है कि ये संहिताएं सुरक्षित, सक्षम और भविष्य के लिए तैयार श्रमबल का निर्माण करेंगी, रोजगार वृद्धि को गति देंगी और आत्मनिर्भर भारत के मार्ग को सशक्त करेंगी। ये भी सुरक्षा के दायरे में इन संहिताओं के लागू होने के बाद श्रमिकों के हित में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं, जिनसे देश के लगभग 50 करोड़ श्रमिकों को सीधा लाभ मिलने की संभावना है। सभी नियोक्ताओं को अब प्रत्येक श्रमिक को नियुक्ति पत्र प्रदान करना अनिवार्य होगा। ओला-ऊबर, स्विगी-जोमैटो जैसे प्लेटफॉर्म पर काम करने वाले श्रमिकों को भी अब सुरक्षा दायरे में लाया गया है। इसके अतिरिक्त, किसी भी श्रमिक को निर्धारित न्यूनतम वेतन से कम भुगतान नहीं किया जा सकेगा, जो अब एक कानूनी अधिकार है। सभी श्रमिकों की साल में एक बार निःशुल्क स्वास्थ्य जांच अनिवार्य होगी और तय समयसीमा में मजदूरी का भुगतान करना नियोक्ता की कानूनी जिम्मेदारी होगी। इस बैठक में भारतीय मजदूर संघ के वनवासी एवं कृषि ग्रामीण मजदूर संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष रादु सिंह भाभर, पूर्व जनपद उपाध्यक्ष बाबू मचार मेघनगर, पूर्व जिला मंत्री दिनेश देवाना मेघनगर, पूर्व सरपंच नटवर बामनिया मेघनगर, और संघ के जिला मीडिया प्रभारी मुकेश सिसोदिया सहित अन्य पदाधिकारी और सदस्य उपस्थित रहे।


