बनास नदी में बजरी का खनन लगातार जारी है। इसके कारण नदी का प्राकृतिक स्वरूप बिगड़ रहा है। बनास नदी में ग्रेवल रोड बनाई जा रही है, जबकि नदी में बजरी खनन की एक शर्त यह भी है कि नदी के प्राकृतिक स्वरूप को भी बिगड़ा नहीं जाए। इसका खुलेआम उल्लंघन हो रहा है। नदी में बह रही जलधारा को ही LNT और JCB मशीनों की मदद से मोड़ा जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है- देवली, टोडारायसिंह, दूनी तहसील क्षेत्र में से बह रही बनास नदी में खनन में जुटे लोग मनमानी कर रहे है। बनास नदी के पानी के बीच से इन बड़ी मशीनों की मदद से 20-20 फीट गहराई तक बजरी खनन कर रहे है। पानी के बीच से इन बड़ी मशीनों की मदद से बजरी खनन कर रहे हैं। बजरी ठेकेदारों द्वारा नदी के बहाव क्षेत्र में बड़े सीमेंट पाइप डालकर जलधारा को मोड़ दिया गया है, ताकि पानी के बीच से अवैध रूप से बजरी निकाली जा सके। इससे पर्यावरण को नुकसान हो रहा है। जबकि पर्यावरण स्वीकृति में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि जिस पंचायत या तहसील क्षेत्र में खनन किया जाएगा, वहीं पर पौधारोपण, मार्ग सुधार और अन्य पर्यावरणीय कार्य करवाने होंगे। लेकिन यहां ऐसा नहीं हो रहा है। नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही है। ग्रामीणों ने माइनिंग विभाग, राजस्व विभाग और परिवहन विभाग की भूमिका की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। क्षेत्रीय पर्यावरण अधिकारी शिवकुमार ने बताया- नदी के प्राकृतिक स्वरूप से छेड़छाड़ करना पर्यावरण को नुकसान पहुंचाना है।


