रीडर्स भाटा टोला के लोग जर्जर सड़क से परेशान बोकारो | बोकारो शहर के भाटा टोला तथा इसके आसपास में रहने वाले लगभग 200 मजदूर बीएसएल में ठेका मजदूरी करते हैं। जबकि इस टोला की आबादी लगभग 1500 है। लेकिन इस इलाके में रहने वाले लोगों को जर्जर सड़क से ही आना-जाना पड़ रहा है। इतना ही नहीं इस टोले में कई ऐसे भी सड़क है, जो आज तक बनाए ही नहीं गए हैं। इस वजह से यहां रहने वाले लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। दिन में तो जर्जर सड़क की स्थिति दिखाई देती है, पर रात में लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों ने कहा कि सड़क निर्माण को लेकर कई बार आवेदन दिया गया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। राजेंद्र नगर में मूलभूत समस्या क्लिक आप भी बता चाहते हैं जनतहित के किसी मुद्दो या समस्या के बारे में…तो उनसे जुड़ी डिटेल और फोटो-वीडियो अपने नाम पते के साथ हमें 9123463209 नंबर पर वॉट्सएप कीजिए। एस कुमार का सवाल : नए बाइपास से राजेंद्र नगर के बीच गरगा नदी पर पुल का निर्माण किया गया। पर सड़क पर स्ट्रीट लाइट नहीं लग पाया है। इस वजह से शाम के बाद भय का माहौल रहता है। कब तक इस इस क्षेत्र में स्ट्रीट लाइट लगाई जाएगी? जिप सदस्य का जवाब : दो वर्षों से लाइट के लिए जिला परिषद से कोई फंड नहीं आया है। फंड मिलने के बाद लाइट लगाई जाएगी। एके मिश्रा का सवाल : जिस तरह से विधायक मद से लगभग छह करोड़ रुपए का पुल बनाया गया। उसी समय स्ट्रीट लाइट लगाने का प्रयास होता तो लग गई होती। आखिर कब तक स्ट्रीट लाइट लगाई जाएगी? जिप सदस्य का जवाब : जनहित को देखते हुए जिला परिषद से फंड आने के बाद पहली प्रमुखता स्ट्रीट लाइट लगाने की होगी। ताकि लोगों को किसी तरह की परेशानियों का सामना नहीं करना पड़े। जिप सदस्य मंजूषा सिंह बोलीं :- बोकारो | एनएच 23 से राजेंद्र नगर सहित लगभग आधा दर्जन कॉलोनी को जोड़ने वाली एक मात्र पुल लगभग 9 वर्ष पहले बनाई गई है। पर आज तक इस पुल तथा इसके संपर्क सड़क पर स्ट्रीट लाइट नहीं लगाई गई है। इस वजह से शाम होते ही लोगों का आना-जाना कम हो जाता है और आठ बजे के बाद लोग दिखाई नहीं देते हैं। स्ट्रीट लाइट नहीं होने से इस क्षेत्र में आए दिन छिनतई की घटना की संभावना बनी रहती है। हालांकि इस पुल से लगभग 25 हजार की आबादी का जुड़ाव है। जो सिर्फ स्ट्रीट लाइट के नहीं होने से शाम होते ही इस सड़क से आना-जाना कम कर देते हैं। अंधेरे में भय के कारण लोगों को ढाई से तीन किलोमीटर दूर स्थित बारी कोऑपरेटिव पुल से होकर घूमकर जाना पड़ रहा है। – इस फोटो को दैनिक भास्कर के पाठक एस कुमार ने भेजी है।


