भास्कर न्यूज | अमृतसर आरटीए दफ्तर में चालान फर्जीवाड़े को लेकर 3 मेंबरी कमेटी की जांच पूरी हो चुकी है मगर सिविल जज की मुहर-साइन वाले 228 चालानों की जो फेक लिस्ट तैयार की गई, वह अब भी सवालों में है। चूंकि कमेटी को यह लिस्ट नहीं सौंपी गई है। कमेटी की जांच रिपोर्ट में सामने आया है कि जूनियर सहायक कंवलप्रीत सिंह ने दफ्तरी आदेश के बिना पंजाब ट्रांसपोर्ट सोसायटी के कांट्रेक्चुअल मुलाजिम सुखजिंदर सिंह लेखाकार को चालानों का रिकार्ड सौंपा। नियम अनुसार रिकार्ड नहीं सौंपा जा सकता है क्योंकि वह विभाग का कर्मी नहीं है। महिला क्लर्क ने दफ्तरी काम में लापरवाही बरती है। डीएल सस्पेंड करने से संबंधित और बाकी दफ्तरी रिकार्ड क्लर्क बिक्रमजीत को सौंप दिया लेकिन ऑफलाइन ट्रैफिक पुलिस द्वारा जो 228 चालान काटे गए उसका रिकार्ड नहीं। जबकि यह रिकार्ड भी क्लर्क बिक्रमजीत को सौंपना बनता था। दरअसल, बीते 23 अगस्त को महिला क्लर्क का तबादला तरनतारन होने के बाद 2 सितंबर को रिलीव कर दिया गया था। दर्ज कराए बयान में बताया कि चालान की सीट के कामकाज संबंधी किसी और क्लर्क के दफ्तरी आदेश न होने पर सुखजिंदर को आरटीए सेक्रेटरी से मौखिक अनुमति लेने के बाद मुहैया कराया था। कॉन्ट्रेक्ट कर्मी सुखजिंदर ने दफ्तरी रिकार्ड और 228 चालान भी कमेटी को जमा नहीं करवाया। जिसके साथ यह पुष्टि नहीं की जा सकती कि इन चालानों के अलावा भी और चालान इनके पास मौजूद हैं या नहीं। कांट्रेक्चुअल कर्मी सुखजिंदर सिंह ने बीते 10 नवंबर को बयान दर्ज कराया कि चालानों का रिकार्ड कोर्ट में जमा करवा दिया है। क्लर्क कंवलप्रीत कौर ने 228 चालान सौंपे थे जो उसके पास मौजूद हैं। पड़ताल की तिथि तक कोर्ट में जमा नहीं करवाए गए हैं। ट्रैफिक चालानों की फर्जी सूची जिस पर सिविल जज की मोहर लगी वह आरटीओ को पेश करने का आरोप लगाने का बयान मीडिया में क्यों दिया पूछा गया तो कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया। कमेटी को बयान दिया कि इस सूची के बारे उसे कोई जानकारी नहीं है। उसकी तरफ से ऐसी कोई सूची दफ्तर को मुहैया नहीं करवाई गई है। फिर उससे सवाल किया गया कि यह बयान किस आधार पर दिया कि बलविंदर कौर निवासी इब्बन कलां से संबंधित चालान उसके पास मौजूद है और आरसी पीबी 02DA7229 नत्थी है। वहीं कांट्रेक्चुअल कर्मी सुखजिंदर की ओर से मीडिया में दिए गए बयान के आधार पर कमेटी ने शिकायतकर्ता बलविंदर कौर को बीते 11 नवंबर को नोटिस भेजा गया मगर नहीं मिली तो वापस आ गया। फिर 13 नवंबर को नोटिस भेजा गया कि उससे 2 हजार रुपए चालान का निपटारा कराने के लिए लिए गए उस बारे बयान दर्ज कराए। जिस पर 17 नवंबर को आने का आश्वासन दिया मगर नहीं पहुंची। बलविंदर कौर निवासी इब्बन कलां झब्बाल रोड के भाई का आरोप था कि कॉन्ट्रेक्ट कर्मी सुखजिंदर ने 2 हजार रुपए की बिना रसीद दिए चालान के बाद जब्त की गई आरसी मुहैया करवाई। जज के दस्तखत और मोहर लगाकर चालान कोर्ट में जमा कराने का झूठा दावा करने की कोशिश का आरोप भी लगाया। रिश्वत मामले की शिकायत जब आरटीए के पास पहुंची तो कॉन्ट्रेक्ट कर्मी सुखजिंदर ने 228 चालानों की फेक लिस्ट वाट्सएप की थी। लिस्ट में 9 सितंबर की डेट डाली गई थी। जांच पर पता चला कि कोर्ट में जुलाई के बाद आरटीओ विभाग का कोई चालान जमा ही नहीं करवाया गया है। दैनिक भास्कर ने बीते 31 अक्टूबर को मामले का खुलासा किया जो आरटीए सेक्रेटरी ने निष्पक्ष जांच के लिए एटीओ मनदीप सिंह सोरी, सेक्शन अफसर गुरमनदीप सिंह, व स्टेनो गुरप्रीत सिंह की 3 मेंबरी कमेटी गठित की।


