बस स्टैंड के बाहर तीसरे दिन भी प्रदर्शन जारी रहा। अब हरियाणा के कर्मचारियों ने भी समर्थन देने का ऐलान कर दिया। हरियाणा रोडवेज कर्मचारी सांझा मोर्चा ने पंजाब रोडवेज, पीआरटीसी और पनबस कर्मचारियों के निजीकरण और किलोमीटर स्कीम के खिलाफ चल रहे आंदोलन को खुला समर्थन दे दिया है। मोर्चा की आपातकाल बैठक में इस मुद्दे पर बड़ा फैसला लिया गया। मोर्चा ने कहा कि हरियाणा में भी 2018 में किलोमीटर स्कीम लागू की गई थी और इसका नुकसान जनता और विभाग दोनों को भुगतना पड़ा। प्राइवेट बसें न तो भरोसेमंद हैं और न ही जनता के हित में। कर्मचारियों ने उस समय भी सरकार से सरकारी बसों का बेड़ा बढ़ाने की मांग की थी, लेकिन सरकार ने नजरअंदाज कर दिया। मोर्चा ने चेतावनी देते हुए कहा कि अब पंजाब में उसी स्कीम को दोहराने की कोशिश की जा रही है, जबकि पंजाब के विभिन्न कर्मचारी संगठन इसका विरोध कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी स्पष्ट कह चुके हैं कि किलोमीटर स्कीम किसी भी तरह जनता, विभाग या परिवहन कर्मियों के हित में नहीं है। हरियाणा रोडवेज मोर्चा ने पंजाब सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पंजाब में आंदोलन कर रहे कर्मचारियों पर लाठीचार्ज, गिरफ्तारियां और बर्बरता बेहद निंदनीय और तानाशाही कदम है। मोर्चा ने पंजाब सरकार को पत्र के माध्यम से साफ चेतावनी दी है कि आंदोलनरत कर्मचारियों की मांगें तुरंत सुनी जाएं, किलोमीटर स्कीम रद्द की जाए और निजीकरण बंद किया जाए। मोर्चा ने कहा-अगर पंजाब सरकार ने रवैया नहीं बदला तो 1 दिसंबर को हरियाणा रोडवेज के सभी डिपो दो घंटे का प्रदर्शन करेंगे।


