भास्कर न्यूज| लुधियाना धर्मसभा में संत अश्वनी बेदी महाराज ने परम पूज्य स्वामी सत्यानन्द महाराज की वाणी का वर्णन करते हुए कहा कि वेद और पुराण ‘राम’ नाम को ‘तारक मंत्र’ बताते हैं, क्योंकि यह नाम संकट, रोग, भय, नकारात्मकता और जन्म-मरण के बंधन से मुक्ति देता है। सभा में बैठे लोग उस समय पूरी तल्लीनता से सुन रहे थे, जब महाराज ने कहा कि राम नाम शिव और विष्णु दोनों के तत्वों को समाहित कर साधक को अलौकिक शक्ति और परम शांति देता है। उन्होंने बताया कि राम नाम का जाप शारीरिक रोगों को शांत करता है, मानसिक संकटों को दूर करता है और मोक्ष तक का मार्ग खोल देता है। यह जाप किसी विधि, समय या स्थान का मोहताज नहीं है और निरंतर जपने से मनुष्य के भीतर अद्भुत तेज और सकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न होती है। कथा के दौरान जब उन्होंने लंका सेतु निर्माण में पत्थर तैरने वाली कथा सुनाई तो पूरे पंडाल में एक साथ जयकारे गूंज गए। सभा स्थल पर भक्त बड़ी संख्या में मौजूद थे। वातावरण में भक्ति, सन्नाटा और श्रद्धा का ऐसा संगम था कि हर व्यक्ति खुद को कथा का हिस्सा महसूस कर रहा था। संत महाराज ने बताया कि राम नाम का जाप औषधि की तरह काम करता है। यह मन को स्थिर करता है, चिंता और भय को मिटाता है और जीवन की हर विपत्ति को हल्का कर देता है। उन्होंने कहा कि मानसिक अवसाद, नकारात्मक विचार, बेचैनी और तनाव जैसे संकट राम नाम की शक्ति से दूर हो जाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कलियुग में मोक्ष प्राप्त करने का सबसे सरल उपाय राम नाम ही है। यह पापों का नाश करता है और आत्मा को परमधाम की ओर ले जाता है। संत महाराज ने बार-बार जोर देकर कहा कि राम नाम में वह शक्ति है जो असंभव को संभव कर देती है, जैसे समुद्र में पत्थर तैर गए थे। सभा के अंत में उन्होंने भावुक स्वर में कहा राम नाम इस लोक और परलोक दोनों में हमारा सच्चा साथी है। इसे जीवन में अपनाने वाला व्यक्ति कभी अकेला नहीं होता। उसके सभी कष्ट दूर होते हैं और मनोवांछित फल मिलता है।


