340 पौधे लगाने जमीन तय नहीं, रोज 8500 लीटर ऑक्सीजन छोड़ रहे 34 पेड़ों को काटेंगे

भास्कर न्यूज | बालोद जिला मुख्यालय में एक ओर सौंदर्यीकरण प्रोजेक्ट के तहत वन विभाग पेड़ों की कटाई कर रही है। दावा किया जा रहा है कि एक सप्ताह के अंदर कुल 34 पेड़ों की कटाई होगी। वहीं दूसरी ओर सच्चाई यह है कि 34 पेड़ काटने के एवज में 340 पौधे लगाने के लिए अब तक जमीन चिह्नांकित नहीं हो पाई है। कब तक जमीन फाइनल होगी, पौधे लगाएं जाएंगे। इसके लिए फिलहाल प्रस्ताव ही नहीं बना है। जबकि एक पेड़ काटने पर 10 पौधे लगाने का नियम है। वन विभाग के रेंजर का कहना है कि शासन से अनुमति के बाद पेड़ों की कटाई हो रही है। यह काम होने के बाद पौधरोपण के लिए विभागीय कार्रवाई शुरु होगी। वहीं शहर के लोगों का कहना है कि प्रोजेक्ट को पूरा कराने पेड़ों की कटाई हो रही है, इसमें कोई दिक्कत नहीं है लेकिन इसके एवज में पौधे लगाना चाहिए लेकिन वर्तमान में सिर्फ पेड़ों की कटाई पर ही फोकस किया जा रहा है। आशीष जैन का कहना है कि शहर के अंदर जिन पेड़ों की वजह से हमें ऑक्सीजन मिल रही है, उनकी कटाई हो रही है। इसकी भरपाई करने कोई सकारात्मक पहल नहीं कर रहें है। प्रोफेसर डॉ. दीपक गुप्ता , वनस्पति शास्त्र पेड़ों की कटाई के पहले पौधरोपण होना चाहिए, यहां उल्टा काम हो रहा पीडब्ल्यूडी के पूर्व एसडीओ रामकिशोर अवस्थी व पुष्कर कुमार का कहना है कि पेड़ों की कटाई के पहले पौधरोपण होना चाहिए, तब किसी प्रकार की आपत्ति नहीं करते। फिलहाल विकास के नाम पर विनाश हो रहा है। अजय यादव का कहना है कि पेड़ों की कटाई हो रही है लेकिन इसके बदले कितने पौधे लग रहे हैं। यह कोई बता नहीं रहा है। पेड़ लगाना कम और कटाई ज्यादा मात्रा में हो रही है। रोशन सार्वा का कहना है कि बालोद में कुछ ही पेड़ बचा है। कुछ दिन में कटाई पूरी हो जाएगी। प्रोजेक्ट के तहत काम पूरा कराना जरूरी है लेकिन भरपाई करने पौधे लगाने पहल करने की जरूरत है। एक पेड़ एक दिन में औसतन 230 से 250 लीटर ऑक्सीजन छोड़ती है। बरसों पुराने पेड़ जैसे बरगद, पीपल यह लगभग 300 लीटर तक ऑक्सीजन छोड़ती है। पौधे से पेड़ बनने में 5 साल का समय लग सकता है। इस लिहाज से अगर बालोद में 34 पेड़ों की कटाई होती है तो एक दिन में 8 हजार 500 लीटर ऑक्सीजन की सप्लाई नहीं होगी। इसकी भरपाई के लिए पौधरोपण ही विकल्प है। पहले से ही संबंधित विभाग के अफसरों को इस दिशा में प्लानिंग बनाकर कार्य कराना चाहिए था।

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