85 उत्पादक संगठनों से जुड़ीं 1,16,474 महिला किसान

रांची झारखंड की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में कृषि एवं पशुपालन दोनों का अहम योगदान रहा है। आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में लघु पशुपालन करने का अधिक प्रचलन है। झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (जेएसएलपीएस) ने इस क्षेत्र को वैज्ञानिक और तकनीकी सहायता देकर सखी मंडल की महिलाओं को आजीविका की मुख्य धारा से जोड़ दिया है। जेएसएलपीएस ने कुल 23 लाख से अधिक ग्रामीण परिवारों को प्रशिक्षण एवं वित्तीय सहयोग उपलब्ध करा कर कृषि आधारित आजीविका से साधनों से जोड़ा है। जिनमें से 8.12 लाख लोगों को पशुधन से संबंधित गतिविधियों से जोड़ा गया है। जेएसएलपीएस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, वैज्ञानिक विधि से खेती एवं पशुओं की देख-रेख में सहयोग करने के लिए 16,229 आजीविका कृषक सखी और 9215 आजीविका पशु सखी विकसित किए गए हैं। जिससे उपज में वृद्धि एवं पशुओं की मृत्यु दर में कमी आई है। कुल 3,134 उत्पादक समूहों का गठन कर 1,25,930 ग्रामीण महिलाओं को जोड़ा गया है। जोहार परियोजना के अंतर्गत 2.24 लाख उत्पादकों को 3,922 उत्पादक समूहों में संगठित किया गया है। इन संस्थानों को समर्थन देने के लिए लगभग 17,000 सामुदायिक कैडरों को प्रशिक्षित किया गया है। परियोजना के कुल लाभुकों में से 64 प्रतिशत एसटी-एससी परिवार हैं। 2.729 उच्च मूल्य कृषि उत्पादक समूह का गठन कर 1,55,902 परिवारों को जोड़ा गया है। 554 पॉली नर्सरी हाउस स्थापित किए गए और नर्सरी उद्यमियों को मिट्टी रहित पौधा उगाने हेतु प्रशिक्षित किया गया है। सिंचाई योजनाओं के माध्यम से 25,000 किसान को जोड़ा गया। बकरी एवं सुकर पालन में झारखंड की करीब 26,000 महिलाओं को जोड़ा गया। 48401 परिवारों को लघु वनोपज की गतिविधियां से जोड़ कर अतिरिक्त आय दिया जा रहा है। अब तक लगभग 450 मीट्रिक टन उत्पादन किया गया है, जिसका मूल्य लगभग 15 करोड़ रुपए है। 2,00,000 परिवारों की आय में होगी गुणात्मक वृद्धि जोहार परियोजना विश्व बैंक एवं झारखंड सरकार द्वारा पोषित आजीविका संवर्धन की छह वर्षीय परियोजना है। इसमें 3,922 उत्पादक समूहों के जरिए 50 प्रतिशत लघु एवं सीमांत महिला किसानों को शामिल कर 2,00,000 परिवारों की आय में गुणात्मक वृद्धि की जाएगी। इस परियोजना का लक्ष्य झारखंड के 17 जिलों के 68 प्रखंड में उच्च मूल्य कृषि, पशुधन, मत्स्य पालन और लघु वनोपज क्षेत्र के लिए बाजार आधारित हस्तक्षेप करना है। लाइवलीहुड फार्म डोमेन के अंतर्गत कुल 85 किसान उत्पादक संगठन बनाए गए हैं। जिससे 1,16,474 महिला किसान जुड़ी हैं। इन उत्पादक संगठन का संचालन स्वयं ग्रामीण महिलाएं करती हैं। जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए कुल 325 जैविक क्लस्टर विकसित किए गए हैं। बिरसा हरित ग्राम योजना के तहत कुल 1,93,8516 लकड़ी के पौधे और 35051 फलदार पौधे का विकास और आपूर्ति की गई है। जेएसएलपीएस की सखी दीदियां दीदी बाड़ी योजना के तहत सब्जी के साथ-साथ फलदार औैर इमारती पौधे लगा रही हैं। इन सखी दीदियों के द्वारा अब तक 1.15 करोड़ फलदार औैर इमारती पौधे लगाए जा चुके हैं। – दीपिका पांडेय सिंह, ग्रामीण विकास मंत्री

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *