अमृतसर | नशा विरोधी समाज निर्माण संस्था के चेयरमैन बालकृष्ण शर्मा ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि 2011 में उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री और पंजाब के मुख्यमंत्री से अमृतसर को पवित्र नगरी घोषित करने की मांग की थी। इसके समर्थन में उन्होंने एक दिन का अनशन भी रखा था। शर्मा ने बताया कि इस प्रयास में उन्होंने गोल्डन टेंपल और दुर्ग्याणा मंदिर से भी सहयोग मांगा था। उनका कहना था कि अमृतसर को काशी, अयोध्या, हरिद्वार और कुरुक्षेत्र की तरह धार्मिक महत्व देने की आवश्यकता है। पिछले कई वर्षों में तीन सरकारें बदल गईं, लेकिन किसी ने भी इस प्रस्ताव को लागू नहीं किया। अब 2025 में आम आदमी पार्टी की सरकार ने उनकी मांग को अमलीजामा पहनाया है।


