भास्कर न्यूज | तिल्दा-नेवरा बालाजी मंदिर गोकर्ण भक्ति धाम आश्रम तुलसी में श्रीमद्भागवत महापुराण कथा जारी है। छठवें दिन व्यास पीठ से आचार्य कृष्णेन्द्र महाराज ने कहा कि भगवान को अभिमान पसंद नहीं है। जिस मनुष्य में अहंकार आ जाता है तो भगवान उस मनुष्य का त्याग कर देते हैं। मनुष्य भगवान से कुछ न कुछ चाहते हैं लेकिन भगवान को ही नहीं चाहते हैं। जो व्यक्ति कथा का श्रवण करता हैं उस व्यक्ति का कल्याण होना निश्चित हो जाता है। कर्म करके धन पाना कोई बड़ी बात नहीं है। मनुष्य को अपनी मृत्यु सुधारने का प्रयास हमेशा करते रहना चाहिए। कृष्णेन्द्र महाराज ने रासपंचाअध्यायी का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि महारास में पांच अध्याय हैं। उनमें गाये जाने वाले पंच गीत भागवत के पंच प्राण हैं जो भी ठाकुरजी के इन पांच गीतों को भाव से गाता है वह भव पार हो जाता है। उन्हें वृंदावन की भक्ति सहज में प्राप्त होती है। उन्होंने ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने 16108 कन्याओं से विवाह कर उनके साथ सुखमय जीवन बिताया। भगवान श्रीकृष्ण रुक्मिणी के विवाह की झांकी ने सभी को खूब आनंदित किया। कथा के दौरान भत्तिमय संगीत ने श्रोताओं को आनंद से परिपूर्ण किया।


