पातड़ां के किसान ने खेती के साथ अपनाया डेयरी कारोबार:4 एकड़ में जैविक खेती; प्रतिदिन 3 क्विंटल दूध का उत्पादन, मिठाइयां बना रहे

पंजाब में पटियाला के पातड़ां क्षेत्र के दुगाल कलां गांव के 42 वर्षीय किसान मनजीत सिंह कुक्कू ने खेती के साथ डेयरी को अपनाकर सफलता की मिसाल पेश की है। उनके पास 39 पशुओं की आधुनिक डेयरी है, जिससे रोजाना करीब तीन क्विंटल दूध का उत्पादन होता है। वह दूध के साथ लस्सी, घी, पिन्नी और गाजरपाक जैसे दुग्ध उत्पाद भी तैयार कर बेचते हैं। 2009 में सरकारी संस्था से डेयरी प्रशिक्षण प्राप्त किया मनजीत सिंह ने वर्ष 2005 से 2009 तक डेयरी का काम किया और 2009 में खन्ना के पास सरकारी संस्था से डेयरी संचालन का प्रशिक्षण लिया। कुछ समय बाद अन्य कार्यों में व्यस्त होने के कारण यह काम रुक गया। 2021 में 3 भैंसों से दोबारा शुरू किया कारोबार वर्ष 2021 में उन्होंने महज तीन भैंसों से दूध बेचने का काम फिर शुरू किया। शुद्धता पर ध्यान देने से उनका काम तेजी से बढ़ा और खेतों में आधुनिक डेयरी फार्म तैयार करना पड़ा। अब उनके पास साहीवाल नस्ल की 19 भैंसें और जरसी नस्ल की 20 विदेशी गायें हैं। 48 एकड़ जमीन में जैविक खेती और गन्ना उत्पादन उनके परिवार में भाई, पत्नी और दो बेटे हैं। कुल 48 एकड़ जमीन में से 18 एकड़ अपनी और बाकी ठेके पर है। चार एकड़ में जैविक सब्जियां और गन्ना, जबकि बाकी जमीन में धान और गेहूं की खेती होती है। पशु आहार खुद तैयार कर घटाई लागत पशुओं के लिए चारा और खाद्य सामग्री स्वयं तैयार की जाती है। इससे दूध की गुणवत्ता बेहतर रहती है और लागत कम आती है। खेती में जहरीले कीटनाशकों की जगह देसी खाद और जैविक विधियों का उपयोग किया जाता है। दूध 70 रुपए किलो, घी 1300 रुपए किलो में बिक्री वह दूध 60 से 70 रुपए किलो, लस्सी 30 रुपए लीटर, देसी घी 1300 रुपए किलो, पिन्नी 450 रुपए किलो और गाजरपाक 600 रुपए किलो बेचते हैं। मिठाइयों में चीनी की जगह मिश्री का उपयोग करते हैं और जैविक गन्ने से गुड़ व शक्कर तैयार करते हैं। डेयरी से सालाना 4-5 लाख रुपए की अतिरिक्त आमदनी उन्होंने कई लोगों को रोजगार दिया है। खेती के अलावा डेयरी से हर साल 4 से 5 लाख रुपये की अतिरिक्त आमदनी होती है। प्रशासन ने मॉडल डेयरी फार्म की सराहना की स्थानीय पुलिस और प्रशासन के अनुसार, मनजीत सिंह का कार्य क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणास्रोत है। अधिकारियों ने उनके डेयरी फार्म और जैविक खेती के मॉडल को सराहा है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में प्रेरित करता है। संपर्क करें- 98551-15712

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