रघुराज उपाध्याय | जालोर जरूरतमंदों की सामाजिक सुरक्षा वाली पेंशन योजना खुद ही असुरक्षित है। सिस्टम ऐसा है कि लाभार्थी की मृत्यु, पुनर्विवाह के बाद भी खातों में पेंशन जारी होती रहती है। पेंशन आवेदन से जारी करने तक का जिम्मा ब्लॉक विकास अधिकारियों का है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग इसकी मॉनिटरिंग करता है, लेकिन दोनों ही विभागों में तालमेल नहीं है। लाभार्थी का सालाना वेरिफिकेशन तो किया जाता है, लेकिन मृत्यु के बाद अगले साल तक वेरिफिकेशन होने तक पेंशन जारी होती रहती है। ऐसा कोई सिस्टम नहीं है कि लाभार्थी की मृत्यु के बाद से ही पेंशन जारी होना बंद हो जाए। पिछले 2 वित्तीय वर्षों में जालोर, पाली व सिरोही जिलों के करीब 30 हजार पेंशनरों को 28.88 करोड़ रुपए की पेंशन बिना किसी वेरिफिकेशन के जारी कर दी गई। इनमें कई ऐसे पेंशनर भी हैं जिनकी मौत हो चुकी है, तो कई विधवा दोबारा शादी कर चुकी हैं। मई 2024 में रिकवरी के आदेश जारी किए गए, पर ऐसे पेंशनरों की सूची विभाग के पास नहीं है जिनकी मृत्यु हो चुकी या कोई विधवा पुनर्विवाह कर चुकी है। विभाग के सहायक निदेशक भगवानाराम चौधरी ने बताया कि अभी जिनकी मृत्यु हो चुकी, उनका बैंक के जरिए वसूली होकर राशि विभाग में जमा हो रही है। ज्यादा जानकारी सोमवार को दे पाऊंगा।


