गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन प्रकरण में केन्द्रीय एजेंसी की एंट्री:ED ने परिवहन विभाग और आरटीओ को पत्र लिखकर जांच के दस्तावेज मांगे; एजेंसी ने इसे मनी लॉड्रिंग की श्रेणी में माना

जयपुर सहित राजस्थान के कई अन्य क्षेत्रीय परिवहन कार्यालयों (आरटीओ) में वाहनों के पंजीकरण से जुड़े मामलों में हुई अनियमितताओं,घोटाले की जांच में अब केंद्रीय एजेंसी की एंट्री हो गई है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने इस पूरे मामले को मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट 2002 के तहत मानते हुए इस मामले में परिवहन विभाग और जयपुर आरटीओ से संबंधित दस्तावेज मांगे हैं। सूत्रों के मुताबिक इस प्रकरण में ED को आशंका है कि 500 करोड़ रुपए से ज्यादा की गड़बड़ी हुई है। ED के असिस्टेंट डायरेक्टर की ओर से पिछले दिनों पत्र लिखकर उन सभी आरटीओ कार्यालयों से जांच की प्रति मांगी गई है, जहां इस मामले की जांच हुई है। साथ ही, जांच से जुड़े वाहनों के दस्तावेज भी मांगे गए हैं। इसके अलावा, जयपुर आरटीओ को भी पत्र भेजकर 79 गाड़ियों से संबंधित जांच रिपोर्ट और अन्य दस्तावेज मांगे गए हैं। ईडी के पत्र में जयपुर आरटीओ-1 के मामले में 31 मार्च को गांधी नगर थाने में दर्ज एफआईआर का भी जिक्र किया गया है। यह FIR प्रशासनिक अधिकारी सुरेश तनेजा और प्रोग्रामर (आरटीओ-I) रामजी लाल मीणा के खिलाफ दर्ज कराई गई है। 500 करोड़ रुपए से ज्यादा के घोटाले की आशंका जानकार सूत्रों के मुताबिक इस प्रकरण में जो जांच विभाग के स्तर पर हुई है, उसमें इस तरह के प्रकरण न केवल जयपुर आरटीओ बल्कि जयपुर के अलावा प्रदेश के दूसरे शहरों में संचालित आरटीओ ऑफिसों में भी हुई है। इस जांच रिपोर्ट में 450 से अधिक आरटीओ, डीटीओ, क्लर्क और अलग-अलग जिलों के सहायक शामिल हैं। आंतरिक जांच में कथित रूप से 8 हजार से ज्यादा बैकलॉग मामलों में हेराफेरी का खुलासा हुआ है। साथ ही 2 हजार से ज्यादा गाड़ियों के रिकॉर्ड गायब हैं और लगभग 1,500 रजिस्ट्रेशनों को उनकी वैधता अवधि समाप्त होने के बाद भी अवैध रूप से बढ़ाया जाना सामने आया है। इन चार बिंदुओं के तहत मांगी जानकारी ED की तरफ से पत्र लिखा गया है उसमें चार बिंदुओं पर जानकारी और दस्तावेज मांगे है। इसमें… ये खबर भी पढ़ें RNX सीरीज के नंबर का लाखों में सौदा, RTO के 400 कर्मचारियों पर तलवार लटकी गाड़ियों के वीआईपी नंबर के अलॉटमेंट मामले में 5 दिन पहले (24 नवंबर) दौसा आरटीओ (प्रादेशिक परिवहन अधिकारी) जगदीश अमरावत को निलंबित किया गया था। ये पूरा मामला प्रदेश में लाखों रुपए में बिकने वाले वीआईपी नंबर से जुड़ा था। अकेले सवाई माधोपुर से तीन साल में 257 वीआईपी नंबर जारी किए गए। (पूरी खबर पढ़ें)

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