जैसलमेर में शनिवार को स्वर्णनगरी एक्सप्रेस के लोको पायलट ने ट्रेन धीमी की, जब ड्राइवर ने रेलवे ट्रैक के पास मृत मवेशी को अपना निवाला बना रहे दुर्लभ गिद्धों को देखा। चलती ट्रेन की रफ्तार की कम रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव द्वारा हरी झंडी दिखाकर रवाना की गई यह ट्रेन उस समय धीमी पड़ गई, जब ड्राइवर ने रेलवे ट्रैक के पास मृत मवेशी को अपना निवाला बना रहे दुर्लभ गिद्धों के एक बड़े झुंड को देखा। प्राप्त जानकारी के अनुसार, लाठी क्षेत्र में पटरियों के नजदीक एक मृत गाय पड़ी थी, जिसे खाने के लिए गिद्धों का एक बड़ा समूह जुटा था। ये देख ट्रेन के लोको पायलट ने तुरंत स्थिति भांप ली। उन्होंने ट्रेन की गति धीमी की और लगातार तेज हॉर्न बजाया। ड्राइवर के इस प्रयास से सारे गिद्ध सुरक्षित रूप से उड़ गए और पटरी से हट गए। इसके बाद ही ट्रेन को आगे बढ़ाया गया। इस दौरान ट्रेन में सार लोगों ने इसका वीडियो बना लिया। अब ये वीडियो सामने आने के बाद पर्यावरण व पक्षी प्रेमी लोको पायलट की तारीफ करते नहीं थक रहे। साथ ही वे इस समस्या का समाधान भी करने की भी मांग करने लगे हैं। पटरियों के किनारे फेंसिंग करने की मांग इस घटना पर पर्यावरण प्रेमी पार्थ जगानी ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा- यह अत्यंत सराहनीय है कि एक ट्रेन के लोको पायलट ने अपनी ड्यूटी से बढ़कर इन दुर्लभ पक्षियों की जान बचाई। गिद्ध हमारे पर्यावरण के लिए बहुत महत्वपूर्ण ‘सफाईकर्मी’ हैं और इनकी संख्या तेजी से घट रही है। इस क्षेत्र में पशुओं की अधिकता के कारण ऐसी घटनाएं होती रहती हैं। सरकार और रेलवे को अब इस इलाके में रेलवे पटरियों के दोनों ओर जाली (फेंसिंग) लगाने की मांग पर तुरंत विचार करना चाहिए, ताकि वन्यजीवों का संरक्षण सुनिश्चित हो सके। राधेश्याम विश्नोई की मुहीम आगे बढ़ाने की मांग उठी गौरतलब है कि इससे पहले भी वन्य जीव प्रेमी राधेश्याम विश्नोई ने इस क्षेत्र में गिद्धों की मौत का मुद्दा उठाया था। वे लगातार ट्रेन की पटरियों पर हो रही दुर्लभ गिद्धों की मौत का मामला उठाते रहे थे। मगर पिछले साल उनकी सड़क हादसे में मौत के बाद ये मामला ठंडा पड़ गया था। मगर अब ये वीडियो सामने आने के बाद लोग इसको लेकर गंभीर हुए हैं और दुर्लभ गिद्धों को बचाने की मांग कर रहे हैं। साथ ही सोशल मीडिया पर भी लोग ड्राइवर की संवेदनशीलता की जमकर तारीफ कर रहे हैं। यह घटना न सिर्फ वन्यजीवों के प्रति जागरूकता बढ़ाती है, बल्कि संरक्षण के प्रयासों में रेलवे की भूमिका को भी उजागर करती है।


