परिवहन विभाग ने अपनी मॉनिटरिंग व्यवस्था को अपग्रेड करते हुए अब कॉमर्शियल वाहनों पर होने वाली कार्रवाई को बड़े स्तर पर डिजिटल कर दिया है। जिन वाहनों के पास परमिट, टैक्स, पीयूसी, फिटनेस या इंश्योरेंस नहीं है, उनका चालान अब टोल बूथ से गुजरते ही ऑनलाइन जनरेट हो जाएगा। इससे फील्ड में होने वाली मैनुअल कार्रवाई काफी कम होगी और पूरे सिस्टम में तेजी आएगी। वहीं दूसरा बदलाव यह है कि टोल प्लाजा पर लगे ई-डिटेक्शन सिस्टम के जरिए वाहन का डेटा तुरंत चेक होता है। गड़बड़ी मिलते ही चालान अपने-आप कट जाता है। विभाग का फोकस अब ओवरलोड वाहनों को भी इसी डिजिटल सिस्टम से जोड़ने पर है। यह प्रक्रिया शुरू होते ही मॉनिटरिंग और भी आसान हो जाएगी। ओवरलोड वाहनों को ई-डिटेक्शन से जोड़ने पर फोकस आरटीओ प्रथम राजेंद्र सिंह शेखावत ने बताया कि विभाग ने पांच तरह के प्रमुख वायलेशन को ई-डिटेक्शन में शामिल कर दिया है। इनमें परमिट, टैक्स, पीयूसी, फिटनेस और इंश्योरेंस से जुड़ी अनियमितताएं आती हैं। उन्होंने बताया कि अब टोल प्लाजा से गुजरने वाले कॉमर्शियल वाहनों का डेटा सिस्टम में अपने-आप चेक होता है। यदि कोई वाहन इन श्रेणियों में फेल मिलता है तो उसका चालान तुरंत ऑनलाइन जनरेट हो जाता है। उन्होंने बताया कि इससे न केवल प्रवर्तन तेज हुआ है बल्कि फील्ड स्टाफ को भी राहत मिली है। शेखावत ने बताया- विभाग का अगला फोकस ओवरलोड वाहनों को ई-डिटेक्शन से जोड़ना की है। इसके लागू होते ही डिजिटल प्रवर्तन और प्रभावी होगा।


