बैतूल के शिवाजी ओपन ऑडिटोरियम में सोमवार को अंतर्राष्ट्रीय गीता जयंती समारोह श्रद्धा और सौहार्द के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलित कर मंगलाचरण एवं श्रीमद्भगवद्गीता के पावन पाठ से हुआ। इस अवसर पर जनप्रतिनिधि, अधिकारी, संतजन और बड़ी संख्या में स्कूली विद्यार्थी मौजूद रहे। कार्यक्रम में वक्ताओं ने गीता को शिक्षा से जोड़ने की बात कही और अंत में महाआरती के साथ समापन हुआ। इस अवसर पर नगर पालिका अध्यक्ष पार्वती बाई बारस्कर, जिला पंचायत उपाध्यक्ष हंसराज धुर्वे, श्री सुधाकर पवार, जिला शिक्षा अधिकारी अनिल सिंह कुशवाह, सीएमओ सतीश मतसेनिया, जिला परियोजना समन्वयक भूपेंद्र वरकड़े और जनपद सीईओ शिवानी राय सहित कई अधिकारी तथा बड़ी संख्या में स्कूली विद्यार्थी उपस्थित थे। पवित्र ग्रंथों के संरक्षण पर जोर
समारोह को संबोधित करते हुए सुधाकर पवार ने आधुनिक समय में पवित्र ग्रंथों और धार्मिक परंपराओं के संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि भावी पीढ़ी को इनके महत्व के प्रति जागरूक करना महत्वपूर्ण है। ‘शिक्षा व्यवस्था से जुड़े गीता’
पवार ने विशेष रूप से बच्चों को गीता का ज्ञान कराने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि गीता को हमारी शिक्षा व्यवस्था और बच्चों की पढ़ाई से जोड़ना समय की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि भगवद्गीता में 18 अध्याय और 700 श्लोक हैं, जो जीवन के हर क्षेत्र में मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। गीता कर्तव्यपालन, आत्मबल, समर्पण, सत्य और धर्म जैसे महत्वपूर्ण जीवन-मूल्यों की शिक्षा देती है। एक स्वर में हुआ श्लोकों का उच्चारण
इस अवसर पर उपस्थित अतिथियों, संतजनों, विद्वानों और नागरिकों ने एक स्वर में गीता के पवित्र श्लोकों का उच्चारण किया, जिससे वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया। बच्चों द्वारा प्रस्तुत गीता श्लोकों ने सबका मन मोह लिया और यह संदेश दिया कि नई पीढ़ी भी धर्म, संस्कार और अध्यात्म की ओर अग्रसर है। महाआरती के साथ हुआ समापन
पूरे आयोजन स्थल में भक्तिभाव, शांति और सकारात्मक ऊर्जा की अनूठी अनुभूति देखी गई। गीता के उपदेश- धर्म, कर्तव्य, सत्य और आत्मबल का महत्व सभी के मन में गहराई से उतरा। कार्यक्रम का समापन गीता जयंती की महाआरती के साथ हुआ। उपस्थित श्रद्धालुओं ने विश्व शांति, मानव कल्याण और सद्भावना की कामना करते हुए आरती में सहभागिता की।


