श्रीगंगानगर जिले के साधुवाली में निर्माणाधीन गाजर मंडी की चारदीवारी से ढाणियों का रास्ता बंद होने से किसानों में आक्रोश है। सोमवार को गाजर मंडी में सैंकड़ों किसान रास्ता खोलने की मांग को लेकर धरने पर बैठ गए और विरोध-प्रदर्शन किया। किसानों ने भजनलाल सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और मुर्दाबाद के नारे लगाए। किसान नेता अमरसिंह बिश्नोई ने बताया- गाजर मंडी की करीब तीन किलोमीटर लंबी चारदीवारी के निर्माण से चक 2-डी की करीब 40 ढाणियों में रहने वाले 100 किसान परिवारों का अपने खेतों और ढाणियों तक आवागमन पूरी तरह बंद हो जाएगा। बिश्नोई ने कहा- राज्य सरकार ने इस वर्ष के बजट में गाजर मंडी की घोषणा की थी, जिससे ग्राम पंचायत साधुवाली के किसानों में खुशी की लहर दौड़ गई। यह मांग करीब 15 साल पुरानी थी और लोगों को उम्मीद थी कि मंडी बनने से क्षेत्र का विकास होगा, रोजगार बढ़ेगा और जमीनों के दाम ऊंचे होंगे। लेकिन जब सरकारी विभागों ने प्रस्तावित गाजर मंडी के नक्शे को जारी किया तो इसमें 40 ढाणियों के लोगों के आवागमन का रास्ता नहीं दर्शाया गया था। नक्शे में गंगनहर की मुख्य नहर के साथ जहां पहले एलएनपी नहर थी, जिसे कई साल पहले बंद कर दिया गया। वहां अब यह मंडी बनाई जा रही है। सिंचाई विभाग ने यह जगह कृषि उपज मंडी समिति को स्थानांतरित कर दी है। बीकानेर रियासत काल में 1932 में एलएनपी नहर का निर्माण हुआ था, जिसके लिए चक 2-डी छोटी के किसानों ने अपनी भूमि समर्पित की थी। किसानों ने बताया- नहर की उत्तर दिशा में किसानों की जमीनें और ढाणियां हैं और आवागमन का रास्ता इसी नहर की पटरी से जाता है। इस चक में रहने वाले सभी किसान लघु और सीमांत श्रेणी के हैं, जो मुख्य रूप से सब्जी उत्पादन से जीवन यापन करते हैं। करीब 100 वर्षों से यह रास्ता उपयोग में है, लेकिन मंडी निर्माण से चक की 40 ढाणियों के करीब 100 परिवारों के करीब 500 लोगों का आवागमन बंद होने वाला है। किसानों ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर किसानों की ढाणियों को जाने वाले रास्ते जल्द नहीं खोले गए तो वे उग्र आंदोलन करेंगे। इसके साथ से ही किसान मंगलवार को गाजर मंडी में अनशन शुरू करेंगे। यह किसानों के साथ अन्याय हो रहा है। किसान किसी भी सूरत में इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे।


