गीता महोत्सव पर 2100 छात्राओं ने एक साथ किया पाठ:मुख्य वक्ता ने गीता को उपनिषदों का सार बताया; बोले- मनुष्य के जीवन से निराशा दूर करता

मऊगंज जिला मुख्यालय में सोमवार को अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव का आयोजन शहीद केदारनाथ महाविद्यालय ग्राउंड में संपन्न हुआ। गीता जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में जिलेभर से आए 2100 विद्यार्थियों ने श्रीमद्भागवत गीता के अध्याय 15वें का सस्वर पाठ किया। कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों की ओर से पुष्प अर्पित कर की गई। मुख्य वक्ता पंडित राजकुमार शर्मा ने गीता ज्ञान के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति को जागृत करने का यह प्रयास अद्वितीय है। पंडित शर्मा ने बताया कि उज्जैन की ओर से पूरे मध्य प्रदेश में गीता जयंती महोत्सव आयोजित किया जा रहा है, जिसके तहत मऊगंज में यह कार्यक्रम संस्कृति विभाग और जिला प्रशासन के सहयोग से संपन्न हुआ। उन्होंने श्रीमद्भागवत गीता को उपनिषदों का सार बताया। पंडित शर्मा के अनुसार, गीता का पाठ मनुष्य के जीवन से अवसाद, हताशा और निराशा को दूर कर उसे ओज, तेज और आत्मविश्वास प्रदान करता है। मऊगंज कलेक्टर ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की कार्यक्रम की अध्यक्षता मऊगंज कलेक्टर संजय कुमार जैन ने की। उन्होंने गीता के श्लोक “कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन” का उल्लेख करते हुए कहा कि बच्चों को कर्तव्य पथ पर अग्रसर रहने की प्रेरणा देने के उद्देश्य से अध्याय 15वें का पाठ कराया गया। कलेक्टर जैन ने सुझाव दिया कि यदि बच्चे प्रतिदिन गीता के किसी श्लोक का अभ्यास करें, तो यह उनके व्यक्तित्व और जीवन दोनों के लिए लाभकारी सिद्ध होगा। उन्होंने बताया कि 5153वीं गीता जयंती के अवसर पर आयोजित यह कार्यक्रम जनसहभागिता और सांस्कृतिक जागरूकता का एक उदाहरण है। युवा पीढ़ी को गीता के प्रेरक संदेशों से जोड़ने की सार्थक पहल इस अवसर पर जनपद पंचायत मऊगंज अध्यक्ष नीलम सिंह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। पुलिस अधीक्षक दिलीप सोनी, अपर कलेक्टर पी.के. पांडे, डिप्टी कलेक्टर पवन गोरैया, सामाजिक कार्यकर्ता रमेश तिवारी, वरिष्ठ वकील संतोष मिश्रा भी मौजूद रहे। इनके अतिरिक्त, जिले के विद्यालयों और महाविद्यालयों के शिक्षक, छात्र-छात्राएं तथा बड़ी संख्या में आम नागरिक भी कार्यक्रम में शामिल हुए। अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव का यह आयोजन सांस्कृतिक धरोहर के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ युवा पीढ़ी को गीता के जीवन-प्रेरक सिद्धांतों को अपनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।

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