मंडला में सोमवार को गीता जयंती महोत्सव का भव्य आयोजन किया गया। यह आध्यात्मिक कार्यक्रम आरडी कॉलेज सभागार में जिला प्रशासन के तत्वावधान में सम्पन्न हुआ। महोत्सव का उद्देश्य श्रीमदभगवद्गीता के ज्ञान और उसके संदेश को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना था। कार्यक्रम में गीता स्वाध्याय, प्रवचन और विविध सांस्कृतिक प्रस्तुतियां हुई। छात्र-छात्राओं ने उत्साह के साथ हिस्सा लिया और गीता के संदेशों का अध्ययन किया। सभी उपस्थित लोगों ने सामूहिक रूप से श्रीमदभगवद्गीता के 15वें अध्याय का पाठ किया और भगवान श्रीकृष्ण के ‘कुरु कर्माणि’ संदेश को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया। काशी गुरुकुल आश्रम के बच्चों ने दी प्रस्तुति कार्यक्रम की विशेष आकर्षण काशी गुरुकुल आश्रम के छोटे बच्चों की मनमोहक प्रस्तुति रही। बच्चों ने गीता पाठ को मधुर स्वर में प्रस्तुत कर पूरा सभागार भावविभोर कर दिया। इसके अलावा कॉलेज और स्कूल के विद्यार्थियों द्वारा किए गए शौर्य प्रदर्शन ने भी कार्यक्रम में ऊर्जा भर दी। जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में लोग हुए शामिल महोत्सव में कलेक्टर, जिला पंचायत अध्यक्ष संजय कुशराम, स्थानीय जनप्रतिनिधियों सहित बड़ी संख्या में युवा, विद्यार्थी और नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने गीता जयंती के इस आयोजन की सराहना करते हुए इसे ज्ञान और संस्कृति से जुड़ने का प्रेरक अवसर बताया। क्यों मनाई जाती है गीता जंयती मान्यता के अनुसार इसी दिन भगवान पूर्णावतार भगवान श्री कृष्ण ने युद्ध के मैदान में अर्जुन को गीता के अनमोल वचन सुनाए थे। यानि इसी दिन श्रीमद्भगवद गीता जन्म हुआ था। गीता जयंती का धार्मिक महत्व हिंदू धर्म के सबसे पवित्र ग्रंथ गीता के श्लोक आज 21वीं सदी में भी लोगों को जीवन की सही राह दिखाने का काम करते हैं। इसमें धर्म के साथ कर्म का मर्म समाहित है। सही मायने में कहा जाए तो यह कर्म, भक्ति और ज्ञान का संगम है, जिसमें डुबकी लगाने वाले व्यक्ति को जीवन में जरूर सफलता मिलती है। भगवान श्री कृष्ण के द्वारा कहे गए गीता के अनमोल वचन व्यक्ति को कठिन समय में जीवन की सही राह दिखाने का काम करते हैं। गीता में कहा गया है कि किस तरह कठिन से कठिन समय में भी कर्म करते हुए धर्म का दामन नहीं छोड़ना चाहिए। सही मायने में देखा जाए तो श्रीमद् भगवद गीता में जीवन की हम समस्या का समाधान मिलता है।


