गोविंददेवजी मंदिर में मनाई गई गीता जयंती:कल मनाया जाएगा व्यंजन द्वादशी उत्सव, भगवान को पहनाएंगे मफलर दस्ताने

जयपुर आराध्य श्री गोविंददेव जी मंदिर में मोक्षदा एकादशी गीता जयंती पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए। ठाकुर श्रीजी का मंगला झांकी के बाद वैदिक मंत्रोचारण के साथ पंचामृत अभिषेक किया गया। इस अवसर पर ठाकुर श्रीजी को लाल रंग की शीतकालीन जामा पोशाक एवं विशेष अलंकार श्रृंगार धारण कराए गए। गीता जयंती के अवसर पर मंदिर महंत अंजन कुमार गोस्वामी ने ठाकुर श्रीजी के सामने गीता पूजन कर सामूहिक रूप से श्रीमद गीता जी का पाठ किया। इसी के साथ मन्दिर श्री गोविन्द देवजी स्थित सत्संग भवन में श्री राम नाम परिक्रमा का उद्घाटन भी किया गया। इस दौरान श्री सरस निकुंज के श्री अलबेली माधुरी शरण महाराज, सरस निकुंज से बड़े भैया जी एवं श्री काले हनुमान जी मंदिर से योगेश महाराज उपस्थित रहे। मंदिर में 02 दिसंबर से 13 दिसंबर तक आम भक्त राम नाम की परिक्रमा लगा सकेंगे। कल मंदिर में व्यंजन द्वादशी उत्सव मनाया जाएगा वहीं मंदिर में मंगलवार को व्यंजन द्वादशी उत्सव मनाया जाएगा। यह उत्सव शीत ऋतु में होने वाले भोज परिवर्तन से जुड़ा है, जिसमें ठाकुर जी को विशेष ऊष्मा देने वाले व्यंजनों का भोग लगाया जाता है। मंदिर प्रशासन के अनुसार इस अवसर पर ठाकुर जी को 101 प्रकार के व्यंजनों का भोग लगाया जाएगा। इसके साथ ही ठंड के मौसम को देखते हुए ठाकुर जी को ऊनी वस्त्र, जिसमें हाथों में दस्ताने, चरणों में मोजे और गले में मफलर धारण कराया जाएगा। 101 व्यंजनों का महाभोग, खीर-खिचड़ा होगा मुख्य प्रसाद
मंदिर सेवाधिकारी मानस गोस्वामी ने बताया- 101 व्यंजनों में 56 प्रकार के छप्पन भोग और 25 प्रकार के कच्चे भोग शामिल होंगे। इनमें मेवा मिश्रित खीर, दाल के बड़े और राधा रानी का प्रिय अढ़की भोग मुख्य आकर्षण रहेंगे। सुबह 12 बजे से 12:30 बजे तक ठाकुर जी की उत्सव झांकी के विशेष दर्शन होंगे। दर्शनार्थियों को खीर-खिचड़ा प्रसाद वितरित किया जाएगा। उत्सव से पहले मंगल आरती के बाद ठाकुर जी का पंचामृत अभिषेक होगा। इसके बाद नवनिधि प्लेटेड केसरिया पोशाक, अंगरखी और अन्य शीतकालीन अलंकरण धारण कराए जाएंगे। व्यंजन द्वादशी से ठाकुर जी की दैनिक सेवा भी शीतकालीन स्वरूप में बदल जाएगी।

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