सांसद अमराराम ने पूछा, राजस्थान में पेड़ कितने लगा दिए?:सोलर कंपनियों ने उजाड़ी वनस्पति, एक पेड़ मां के नाम योजना में देशभर में कितना खर्च आया?

सीकर सांसद अमराराम ने आज संसद में शीत सत्र के पहले दिन ही 3 अतारांकित प्रश्न पूछे- 1. वर्तमान वर्ष में हाल ही में पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और हरियाणा में वैश्विक तापन की वजह से ज्यादा बारिश, गर्मी, ठंड और मौसमी बारिश की वजह से खेती को हुए नुकसान को रोकने के लिए क्या उपाय किए गए? 2. ‘एक पेड़ मां के नाम’ नाम की योजना के तहत लगाए गए कितने पेड़ लगाए और उन पर राज्य-वार खर्च कितना बजट खर्च किया? 3. राजस्थान में सोलर कंपनियों ने कितने पेड़ काटे और उनकी जगह कितने पेड़ लगाए गए? सांसद अमराराम के प्रश्न के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन राज्यमंत्री ने कीर्तवर्धन सिंह ने लोकसभा में जवाब दिए:- पहले‌ प्रश्न का जवाब- सरकार ने देश में कृषि पर ग्लोबल वार्मिंग (विश्वव्यापी ताप क्रम वृ‌द्धि) और जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभावों को कम करने के लिए कई कदम उठाए हैं। वर्ष 2008 में राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन कार्य योजना (एनएपीसीसी) को शुरु हुई थी, जो देश में जलवायु संबंधी कार्यों के लिए व्यापक नीतिगत ढांचा प्रदान करती है। एनएपीसीसी देश को जलवायु परिवर्तन को अपनाने और उसके विकास मार्ग की पारिस्थितिक स्थिरता को बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय रणनीति का विवरण प्रस्तुत करता है। इसमें आठ राष्ट्रीय मिशन शामिल हैं, जिनमें से एक राष्ट्रीय सतत कृषि मिशन (एनएमएसए) है। एनएमएसए का उद्देश्य भारतीय कृषि को बदलते जलवायु के प्रति अधिक अनुकूल और सक्षम बनाने के लिए कार्यनीतियों को तैयार करना और इनका क्रियान्वयन करना है। कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के तहत भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) ने राष्ट्रीय जलवायु अनुकूल कृषि पहल (एनआईसीआरए) नामक सर्वोत्कृष्ट नेटवर्क परियोजना को शुरू किया है। इस परियोजना के माध्यम से देश में जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने के लिए विभिन्न जलवायु परिवर्तन शमन कार्यकलाप किए गए हैं। अन्य कार्यकलापों में, प्रति बूंद अधिक फसल (पीडीएमसी) योजना शामिल है, जिसका उद्देश्य ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों के माध्यम से कृषि स्तर पर जल उपयोग दक्षता को बढ़ाना है। मृदा स्वास्थ्य कार्ड (एसएचसी)/मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन (एसएचएम) योजना राष्ट्रीय परियोजना ‘मृदा स्वास्थ्य एवं उर्वरता प्रबंधन’ और परंपरागत कृषि विकास योजना (पीकेवीवाई) के तहत राज्य सरकारों के माध्यम से संचालित की जा रही है तथा पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए जैविक मूल्य श्रृंखला विकास मिशन (एमओवीसीडीएनईआर) और एकीकृत बागवानी, कृषि वानिकी विकास मिशन तथा राष्ट्रीय बांस मिशन भी कृषि में जलवायु अनुकूलन के संवर्धन को बढ़ावा देते हैं। दूसरे प्रश्न का जवाब- चालू वित्तीय वर्ष में दिनांक 1अप्रैल 2025 से 28 नवंबर 2025 तक लगाए गए वृक्षों की कुल संख्या 113,99,06,411 है। राज्यवार वृक्षरोपण की सूचना की सूची दी जा रही है… तीसरे प्रश्न का जवाब- वन और वृक्ष संसाधनों की सुरक्षा और प्रबंधन मुख्य रूप से संबंधित राज्य सरकार/संघ राज्य क्षेत्र प्रशासन की जिम्मेदारी है। भारत में वृक्षों की अवैध कटाई को रोकने और वनों की सुरक्षा को व्यापक रूप से भारतीय वन अधिनियम, 1927, वन (संरक्षण एवं संवर्धन) अधिनियम, 1980, और वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 सहित संबंधित नियमों और राज्य स्तर के क़ानूनों के माध्यम से नियंत्रित किया जाता है। मंत्रालय, राज्य और संघ राज्य क्षेत्र के वन विभागों के के समन्वय से, वृक्षारोपण, वन संरक्षण और पारिस्थितिक पुनर्स्थापन के उ‌द्देश्य से विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों को कार्यान्वित कर रहा है। इनमें राष्ट्रीय हरित भारत मिशन (जीआईएम), प्रतिपूरक वनीकरण निधि प्रबंधन और योजना प्राधिकरण (सीएएमपीए) और अन्य क्षेत्रीय संबंधित विशेष पहल शामिल हैं। मंत्रालय ने भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद, देहरादून के अंतर्गत जोधपुर, राजस्थान में शुष्क वन अनुसंधान संस्थान (एएफ़आरआई) की स्थापना की है। एएफ़आरआई का दायित्वों में विशेष रूप से शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करते हुए वानिकी अनुसंधान, शिक्षा और विस्तार, वानिकी को वैज्ञानिक और सतत प्रबंधन का संवर्धन करना है। यह संस्थान वानिकी अनुसंधान की आवश्यकताओं का समाधान करने के लिए और राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय महत्व के मामलों और अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबद्धतों में सूचित निर्णय लिए जाने में केंद्रीय एवं राज्य सरकारों की वैज्ञानिक सलाह भी प्रदान करता है।

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