ITAT घूसकांड में 22 ठिकानों पर CBI रेड:अवैध डॉक्यूमेंट व फाइलें की जब्त, दो लॉकर में गहने-कैश मिले

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की ओर से आयकर अपीलीय अधिकरण (ITAT) घूसकांड मामले में 7वें दिन मंगलवार को भी जांच जारी है। ITAT घूसकांड मामले में CBI ने अरेस्ट आरोपियों के 22 ठिकानों पर रेड मारी। CBI रेड में बड़ी मात्रा में अवैध डॉक्यूमेंट, केसों से संबंधित फाइलें, दो लॉकर में सोने के गहने व कैश मिला हैं। वहीं, घूसकांड में पकड़े अकाउंटेंट-मेंबर की रिमांड अवधि पूरी होने पर सोमवार दोपहर CBI ने कोर्ट में पेश किया। कोर्ट के आदेश पर उसे 14 दिन के न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया है। CBI सूत्रों के मुताबिक, ITAT की न्यायिक सदस्य एस. सीता लक्ष्मी, एडवोकेट राजेंद्र सिंह सिसोदिया, मुजम्मिल और अकाउंटेंट-मेंबर कमलेश राठौड़ के 22 ठिकानों पर सीबीआई ने सर्च किया। छापेमारी में बड़ी मात्रा में आपत्तिजनक डॉक्यूमेंट, कैश, गहने और रुपए के लेन-देन का डिजिटल डेटा बरामद किया गया। जांच में पिछले 4 साल के मामलों में दिए गए निर्णय संदिग्ध लग रहे हैं। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि पिछले करीब 4 वर्षों से आयकर अपीलों में राहत दिलाने के बदले भारी रिश्वत ली जा रही थी। आईटीएटी की बेंच में बिल्डर्स, रियल एस्टेट और बड़े कारोबारी समूहों के टैक्स विवादों में मनमानी राहत देने का आरोप है। इसी आधार पर सीबीआई सभी संदेहास्पद फैसलों की जांच कर रही है। ITAT आदेशों के ड्राफ्ट भी संदिग्ध
सीबीआई अब उन निर्णयों की जांच में जुटी है, जिनका ड्राफ्ट मोबाइल और डिजिटल डिवाइस में मिला है। आरोप है कि ड्राफ्ट कुछ और रहते थे और फाइनल आदेश कुछ और निकलते थे। यह बदलाव कैसे और किस दबाव व कितनी रिश्वत के आधार पर होते थे। सीबीआई अब उसकी कड़ियां जोड़ रही है। डिलीट की गई चैट्स और बरामद दस्तावेजों को क्रॉस-वेरिफाई किया जा रहा है। एडवोकेट राठौर की डायरी में निकला हिसाब
एडवोकेट राजेंद्र सिंह सिसोदिया से मिली डायरी में आईटीएटी अधिकारियों से हुए लेन-देन की एंट्रियां मिली हैं। सीबीआई का मानना है कि केस वर्तमान घूसकांड का नहीं, बल्कि पुराने मामले भी खुल सकेंगे।

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